बुंदेलखंड में। हमीरपुर / जनपद के राठ क्षेत्र के जिगनी गांव में मौत के घर में तीन जिंदगियां आज भी अपना जीवन जीने को मजबूर हैं। यह तीनों जिंदगियां पूरी तरीके से गिरे हुए कच्चे घर में छप्पर बनाकर अपनी गुजर बसर कर रही हैं। जिगनी गांव की निवासी महिला सीता देवी पत्नी स्वर्गीय जगदीश सिंह अपनी बेवा बहू विनीता पत्नी स्वर्गीय प्रद्युमन सिंह और नातिन निशु के साथ पूरी तरीके से गिर चुके अटारी में छप्पर बनाकर रह रही हैं। घर में कोई पुरूष सदस्य ना होने की वजह से तीनों लोग अत्यधिक संघर्ष पूर्ण जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। पात्र होने के बावजूद सरकार के द्वारा चलाई जा रही आवास संबंधी किसी भी योजना का लाभ है इनको नहीं मिल सका है। इसे सरकारी सिस्टम की एक बहुत बड़ी लापरवाही कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। ग्रामीणों ने बताया कि जहां पर यह तीन जिंदगियां रहकर जीवन की रही हैं। ऐसी जगह पर कोई व्यक्ति एक दिन भी नहीं रह सकता है। बरसात में इनका गिरा हुआ घर पूरी तरीके से जंगली खरपतवार से घिर गया है जिसमें तमाम तरीके के सांप बिच्छुओं ने भी अपना बसेरा बना लिया है। महिला सीता देवी ने बताया कि जब-जब बरसात होती है तो उन्हें यह बारिश आग के समान लगती है कि कब यह छप्पर वाली अटारी उन पर गिर जाएगी। महिला सीता देवी ने बताया कि वह बीते दो वर्षों से इस हाल में जीने के लिए मजबूर है। बताया कि ग्राम प्रधान से लेकर अन्य संबंधित अधिकारियों को वह अपनी समस्या के बारे में लिखित और मौखिक रूप से अवगत करा चुकी है लेकिन उनकी समस्या पर कोई सुध लेने वाला नहीं है। तथा वह भगवान के भरोसे अपने बहू और नातिन के साथ बस जी रही है। मामले में उपजिलाधिकारी ने बताया कि प्रकरण को संज्ञान में लेकर व खण्ड विकास अधिकारी को अवगत कराकर महिलाओं को संपूर्ण सहायता प्रदान कराई जाएगी।
