हमीरपुर / जनपद की राठ तहसील परिसर का एक भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला सामने आया है। जहाँ बीते 9 माह से परेशान किसानों के द्वारा तहसील परिसर में तैनात एक कानूनगो के द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार और 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने की शिकायत करना महंगा पड़ गया। कानूनगों की शिकायत मिलते ही उप जिलाधिकारी किसानों पर ही फर्जी शिकायत करने का आरोप लगाते हुए किसानों को कस्टडी में बैठा दिया।
राठ तहसील परिसर में वकालत करने वाले अधिवक्ता राजेंद्र कुमार महान ने बताया कि उन्होंने अक्टूबर माह वर्ष 2024 में तीन पत्रावलियां हदबंदी के लिए डाली थी। बताया कि उपजिलाधिकारी के यहां से हदबंदी पैमाइश के लिए आदेश भी हो गया था तथा उसके बाद सभी पत्रावलियां राठ तहसील में तैनात कानूनगों के यहां चली गईं थीं। इसके बाद जब काफी समय बीतने के बाद पैमाइश नहीं हुई तो वह कानून को फिर मिलने के लिए पहुंचे तो कानूनगों ने उन्हें रिश्वत के लिए इशारा किया। बताया कि जब उसने किसानों की गरीबी का हवाला दिया तो कानूनगों ने किसानों से डायरेक्ट मिलवाने के लिए कहा। बताया कि किसानों से मिलवाने पर कानूनगों ने उनसे पैसों की मांग की। वहीं राठ कोतवाली क्षेत्र के नवैनी गांव के निवासी किसान उदयभान पुत्र फूल सिंह व किसान छंगा और गोपीचंद ने बताया कि उन लोगों ने मौजा चिल्ली के गाटा संख्या 1907 और 1908 में अपने खेतों की पैमाइश और हदबंदी कराने के लिए अधिवक्ता के माध्यम से पत्रावलियां दाखिल की थीं। बताया कि पैमाइश का आदेश होने के बाद भी स्थानीय कानूनगों उनके खेत की पैमाइश नहीं कर रहा था। तथा जब वह लोग पैमाइश करने के लिए कहते तो स्थानीय कानूनगों टाल देता। आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय कानूनगों ने पैमाइश करने की एवज में उन लोगों से 50 हजार रुपये की मांग की। बताया कि जब उनके सब्र का बांध टूट गया तो आज शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में वह लोग उक्त कानूनगों की शिकायत करने के लिए पहुंचे जहां पर एसडीएम ने उन्हें हड़काते हुए कस्टडी में बैठा दिया। हालांकि कुछ समय के बाद किसानों को छोड़ भी दिया गया। मामले में उप जिला अधिकारी अभिमन्यु कुमार ने बताया कि सम्पूर्ण समाधान दिवस में शिकायती पत्र आया था। जब उन्होंने कानूनगों का शिकायतकर्ताओं से सामना कराया तो शिकायत करने वाले किसानों ने उक्त कानूनगों को पहचानने से इंकार कर दिया। बताया कि शिकायती पत्र की जाँच कराई जा रही है।
