बुंदेलखंड बुलेटिन न्यूज़
दतिया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) दतिया द्वारा आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) सत्र का आयोजन डॉ. शरद चंद्रा द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय था हेपेटाइटिस बी की एबीसी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में प्रगति।चिकित्सा समुदाय को उन्नत जानकारीऔरनई तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित इस सत्र में बड़ी संख्या में डॉक्टर और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए।आई एम ए दतिया द्वारा आयोजित इस सीएमई में आई एम ए दतिया के पदाधिकारी, जिनमें अध्यक्ष डॉ. प्रशांत हरित, सचिव डॉ. के पी बरैठिया और कोषाध्यक्ष डॉ. के एल गुप्ता प्रमुख रूप से शामिल थे। इस सीएमई के मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हेमन्त मंडेलिया थे,जिन्होंने अपनी प्रेरणादायक बातों से सभी चिकित्सकों को संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एस एन शाक्य ने की और सिविल सर्जन डॉ. के सी राठौर विशेष रूप से उपस्थित हुए।सत्र की मुख्य बातेंडॉ.शरद चंद्रा, जो इस सीएमई सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे, उन्होंनेे हेपेटाइटिस बी के कारण, लक्षण, रोकथाम और उपचार पर विस्तार से जानकारी दी।उन्होंने बताया कि यह बीमारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारण बन सकती है। उनका कहना था, हेपेटाइटिस बी का सही समय पर निदान और उचित प्रबंधन रोगियों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में नवीनतम प्रगति पर डॉ. शरद चंद्रा ने सत्र में एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की। जिससे गैस्ट्रोएंटरोलॉजिकल रोगों का सटीक निदान और प्रभावी उपचार संभव हुआ है। सीएमई में प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित डॉक्टरों ने अपने अनुभव साझा किए और नवीनतम तकनीकों के बारे में जानने का मौका मिला। इस कार्यक्रम में वरिष्ठचिकित्सक डॉ. आर एन आर्य, डॉ अनिल लिटोरिया, डॉ बी के वर्मा, डॉ एच एम उज्जैनिया, डॉ सचिन सिंह यादव, और डॉ एस एस तोमर, मुख्य रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. हिमांशु शर्मा ने किया, जिनके कुशल संचालन से सत्र को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया गया। कार्यक्रम के अंत में आईएमए दतिया के सचिव डॉ. केपी बरैठिया ने धन्यवाद ज्ञापन किया और सभी उपस्थित विशेषज्ञों और चिकित्सा पेशेवरों का आभार व्यक्त किया। दतिया और आसपास के क्षेत्रों के चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने डॉ. शरद चंद्रा के प्रयासों की सराहना की और उन्हें क्षेत्र में चिकित्सा जागरूकता और प्रगति लाने का श्रेय दिया। यह सीएमई कार्यक्रम चिकित्सा क्षेत्र में नवीनतम जानकारी साझा करने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास साबित हुआ।
