गुरसरांय(झांसी)। नगर के श्री महावीर बाल शिक्षा संस्कार इंग्लिश मीडियम विद्यालय में उस वक्त हड़कंप मच गया,जब जिले से शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा नामित जाँच अधिकारी ने विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया। यह कार्रवाई एक पीड़ित अभिभावक धर्मेंद्र स्वर्णकार द्वारा विद्यालय प्रबंधन पर बच्चों को फर्जी ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) और मार्कशीट के गंभीर आरोपों के बाद की गई है। बताते चले स्थानीय अभिभावक ने हाल ही में शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों से शिकायत की थी। अभिभावक का आरोप है कि विद्यालय प्रशासन ने उनके बच्चे के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उसे दूसरे स्कूल की टीसी और मार्कशीट दी गयी जबकि उसके बच्चे ने जब इसी विद्यालय में प्रवेश लिया था तो दूसरे विद्यालय की टीसी और मार्कशीट अभिभावक को क्यों दी जा रही है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नियुक्त किए गए जाँच अधिकारी ने सभी बिन्दुओं पर बारीकी से जाँच की। अभिभावक की शिकायत के आधार पर विद्यालय का निरीक्षण किया गया है। प्रथम दृष्टया अनियमितताएं और विसंगतियां पाई गई हैं। जाँच अधिकारी ने अभिभावक को आश्वासन दिया है कि पूरी पारदर्शिता के साथ मामले की जाँच की जा रही है। जाँच अधिकारी ने अभिभावक से फीस की रसीद,टीसी,कच्ची रसीद,शिकायती पत्र सहित अन्य संबन्धित कागज लेकर उच्च अधिकारियों को संबंधित मामले से अवगत कराने की बात कही है। वही अभिभावक धर्मेंद्र सोनी ने आरोप लगाया है कि जाँच टीम के आते ही बच्चों की स्कूल से छुट्टी कर दी गयी और विघालय के पीछे वाले गेट से बच्चों को बाहर निकाल दिया गया। अभिभावक ने आरोप लगाया है कि विघालय में फायर विभाग की एनओसी भी नही है। अभिभावक ने कहा कि इस संबंध में स्थानीय व क्षेत्रीय शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों को छोड़कर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच एवं प्रभावी कार्रवाई की पहल क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से लेकर शासन से की है क्योंकि अभी तक इस विद्यालय की जो शिकायतें हुई है उसमें सारी अनियमितताएं साबित होने के बाद प्रभावशाली लोगों के दबाव में सच्चाई पर पर्दा डालकर जांच को फर्जी तरीके से निस्तारण किया गया है जो पीड़ित ने अपने प्रार्थना पत्र में लिखकर अधिकारियों को आपबीती बताई है। जब जाँच अधिकारी विद्यालय में कक्षा का निरीक्षण करने गये तो उन्होंने बच्चों से पूँछा कि यहां पर कक्षा 9 एवं 10 की क्लास लगती है क्या तो जवाब में बच्चों ने कहा हाँ ऊपर लगती हैं।
जांच के नाम पर उठ रहे सवाल
विद्यालय में लगातार मिल रही अनियमितताओं की शिकायतों के बाद भी विभाग द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने से अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब विद्यालय के खिलाफ पहले भी कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं,तो फिर हर बार ‘जांच’ के नाम पर केवल एक व्यक्ति को भेजकर औपचारिकता क्यों की जाती है? अभिभावकों का आरोप है कि इस विद्यालय की मनमानियों और अव्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में कई बार लिखित शिकायतें जिले के उच्चाधिकारियों को सौंपी जा चुकी हैं। इन गंभीर समस्याओं पर अधिकारियों को अवगत कराया गया। लेकिन हर बार शिकायत के बाद जांच कमेटी तो बैठती है,पर नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहता है। जब शिकायतें बिल्कुल साफ हैं,तो विभाग बार-बार जांच के नाम पर समय क्यों काट रहा है? जांच टीम आती हैं,प्रबंधन से बात करती हैं और बिना किसी जमीनी कार्रवाई के वापस लौट जाती हैं। शिकायतों पर ठोस कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि छात्रों के भविष्य से ज्यादा अधिकारियों के लिए कागजी कोरम पूरा करना जरूरी है।इस ढुलमुल रवैये से नाराज होकर स्थानीय समाजसेवियों और अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी जांच को महज एक औपचारिकता बनाकर छोड़ दिया गया,तो वे चुप नहीं बैठेंगे। इस मामले को लेकर जल्द ही जिला मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन और घेराव की रणनीति तैयार की जा रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बार भी पुरानी ढर्रे पर चलता है या फिर कोई निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई करता है।
