बुंदेलखंड बुलेटिन न्यूज
रिपोर्ट-शौकीन खान/कौशल किशोर गुरसरांय
गुरसरांय (झांसी)।पटकाना के खेरापति हनुमानजी मंदिर पर चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का सुदामा चरित्र की कथा के साथ समापन हो गया।ज्योतिषाचार्य पं भगवत नारायण समाधिया ने भगवान के परम सखा सुदामा जी का वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा जी परम संतोषी ब्राम्हण थे।जो संतोषी होता है वही परम धनवान होता है।उन्होंने कहा कि शिक्षा के अनेक गुरु हो सकते है,लेकिन दीक्षा गुरु एक ही होना चाहिए।विवेक की दृष्टि खुली हो तो किसी से भी शिक्षा प्राप्त की जा सकती है।एकादश स्कंध में भक्ति एवं ज्ञान मार्ग से ईश्वर को प्राप्त करने की बात उन्होंने कही।कलयुग में हरी नाम संकीर्तन ही मुक्ति का सबसे बड़ा साधन बताया।कथा में अपार भक्तों का सैलाव उमड़ पड़ा।भजनों की प्रस्तुति पर श्रोता जमकर नाचे।कथा का मूल पाठ आचार्य आकाश अर्जरिया ने किया।संगीतमय कथा में सितार पर पं सरजू शरण पाठक,ऑर्गन पर सोनू पटेल,तबले पर धर्मेन्द्र कौशिक,नाल पर मनमोहन, सहगायन पर योगेश कुमार,हनी नामदेव, प्रिंस पटेल ,अंकुल पटेल ,ने संगत की।कथा की आरती परीक्षित श्रीमती विद्या देवी लक्ष्मीनारायण सिंह घोष,देवेन्द्र घोष,ध्रुव दीप सिंह घोष ,सज्जन सिंह,गजेन्द्र सिंह घोष ने की।इस मौके पर प्रबल प्रताप सिंह ठाकुर ललितपुर,बसंत मोदी,रामायणी पं रामेश्वर पाठक,संगीतगुरु पं परशुराम पाठक,के के तिवारी,महेन्द्र सिंह घोष, चंद्रप्रकाश चौरसिया, ठाकुरदास तिवारी,विनोद पटेरिया,रमेश अग्रवाल, डी आर गंगा प्रसाद श्रृंगीऋषि, सरोज चंसौरिया,कान्तरे,,डॉ नरेश तिवारी,डॉ जैतराम अग्रवाल,महावीर प्रसाद सिंह,नरेंद्र प्रताप महते,संजय दोन्देरिया,कौशलेश मिश्रा,एन डी शर्मा,विवेक चतुर्वेदी,श्याम सुंदर रिछारिया,हरी बाबू शर्मा,पूर्व चेयरमैन गोपीनाथ बक्शी,नरेश तिवारी सहित बड़ी में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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