झांसी- आज दिनांक 28 सितम्बर को विश्व रैबीज दिवस के अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, झांसी की अध्यक्षता में गोष्ठी आयोजित की गयी। गोष्ठी में नोडल अधिकारी, डा० रामाकान्त स्वर्णकार, डा० अंशुमन तिवारी, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डा० अशीष अग्निहोत्री, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्राईवेट चिकित्सालय, के चिकित्सक, श्री आर०के० त्रिपाठी, जिला मलेरिया अधिकारी, झांसी डा० अनुराधा राजपूत, इपिडिमियोलॉजिस्ट एवं समस्त जिला सर्विलेन्स यूनिट उपस्थित रही।
डॉ शिशिर पुरी मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा बताया गया कि-
रैबीज है जानलेवा परन्तु रैबीज का प्रतिरोध पूर्णतः संभव है- टीकाकरण करवायें और सुरक्षित रहें।
रैबीज बीमारी एक वायरस के संक्रमण से होने वाले घातक बीमारी है जो मनुष्यों एवं जानवरों के लिए हमेशा घातक होता है। लेकिन बचाव पूरी तरह संभव है। यह बीमारी ज्यादातर कुत्तों (96%) के काटने या खरोचने के कारण होती है लेकिन बिल्ली, बंदर या अन्य जंगली जानवरों के द्वारा भी हो सकती है।
कैसे होता है संक्रमण :
यदि कोई भी जानवर असामान्य रूप से आपको काट देता है तो वह रैबीज हो सकता है क्योंकि सामान्यतः पालतू जानवर ऐसा नहीं करते जब तक कि वह संक्रमित ना हो।
यदि जानवर काट ले तो क्या करें सबसे पहले घाव को साबुन और साफ बहते पानी से
अच्छी तरह धोएं। घाव को खुला छोड़े, टांके या बैंडेज ना लगाएं।
त्वरित उपचार जरूरी है डा० रमाकान्त स्वर्णकार, नोडल अधिकारी
नजदीकी चिकित्सक से मिले और बचाव हेतु त्वचा या मांसपेशियों में टीके अवश्य लगवाएं। सामान्यतः मांसपेशियों में लगने वाले पांच टीके अथवा त्वचा के नीचे लगने वाले चार टीके चलन में है। घाव का उपचार चिकित्सक द्वारा जांच कर श्रेणी के आधार में किया जाता है।
कैटेगरी 01-
प्रथम श्रेणी में जिसमें केवल त्वचा में जानवर का लार, या छूने या प्यार करना आता है, में किसी भी प्रकार के टीके की आवश्यकता नहीं होती।
कैटेगरी 02-
द्वितीय श्रेणी में त्वचा में दांत या नाखून से आए हुए खरोच या लालिमा जिसमें हल्का सा रक्त का स्राव हो आता है, जिसके उपचार हेतु त्वचा में कुल 4 टीके उपचार के प्रथम दिवस अर्थात दिवस 0, 3, 7 और 28वें दिन लगवाए जाते हैं। इसी प्रकार यदि मांसपेशियों में लगने वाले टीके का चयन किया जाता है तो दिवस शून्य 0, 3, 7, 14 और 28 दिन तक पांच टीके लगाए जाते हैं।
कैटेगरी 03-
तृतीय श्रेणी के घाव में श्रेणी 2 की तरह टीके के साथ-साथ एंटीबॉडी के रूप में इम्यूनोग्लोबुलीन घाव के चारों तरफ मरीज के वजन के आधार पर निर्धारित करके लगाया जाता है।
क्यों है खतरनाक : डॉ० रमाकान्त स्वर्णकार (नोडल अधिकारी)
समय पर टीका लगाकर आप रैबीज जैसे जानलेवा बीमारी से खुद को बचा सकते हैं
