झांसी -आज दिनांक 04.06.2026 को आकाशवाणी झांसी पर “साइबर सुरक्षा: चुनौतियां और समाधान” विषय पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील विशेष वार्ता का प्रसारण किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में जनपद झांसी में तैनात सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP), साइबर सेल श्रीमती अरीबा नोमान उपस्थित रहीं। वार्ता के दौरान उन्होंने जनपद झाँसी क्षेत्र में बढ़ रहे साइबर अपराधों के ट्रेंड्स, अपराधियों के मनोविज्ञान और उनसे बचने के व्यावहारिक सुरक्षात्मक उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
1. वार्ता के मुख्य बिंदु एवं दिशा-निर्देश:
• बुंदेलखंड/झांसी क्षेत्र में सक्रिय प्रमुख साइबर अपराध: म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) का बढ़ता जाल: अपराधी गरीब व मासूम लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके बैंक खाते किराए पर ले लेते हैं और उनमें धोखाधड़ी की बड़ी रकम जमा कराते हैं। किसी को भी अपना खाता किराए पर न दें।
• फर्जी मैरिज ब्यूरो व सेक्सटॉर्शन: फर्जी मैट्रिमोनियल साइट्स और कॉल सेंटर्स के माध्यम से शादी का झांसा देकर लोगों को हनी ट्रैप/सेक्सटॉर्शन का शिकार बनाया जा रहा है।
• डिजिटल अरेस्ट और भय का माहौल: खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराया जाता है और उनसे मोटी रकम वसूली जाती है।
2. अपराधियों का मनोविज्ञान (Psychology of Cyber Criminals):
साइबर अपराधी अत्यधिक पढ़े-लिखे और प्रशिक्षित होते हैं। वे आम जनता के ‘शॉर्टकट से तुरंत पैसा कमाने’ के लालच और डर की मानसिकता का फायदा उठाते हैं।
3. सुरक्षा एवं बचाव के अचूक उपाय (Cyber Hygiene):
• URLs की जांच: किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले ध्यान दें कि वह https:// (S का अर्थ Secure) से शुरू हो रहा हो।
• संदेह और क्रॉस-वेरिफिकेशन: जानकारों या परिवार के सदस्यों के नाम से आए मैसेज पर भी बिना फोन पर बात किए भरोसा न करें, क्योंकि उनका अकाउंट भी हैक हो सकता है।
• अज्ञात APK फाइल्स से दूरी: सोशल मीडिया पर आने वाले “गुड मॉर्निंग” मैसेजेस या अनजान फाइल्स को डाउनलोड न करें, ये स्पाइवेयर हो सकते हैं।
• पब्लिक वाई-फाई का प्रयोग न करें: मुफ्त वाई-फाई के लालच में न आएं, यह फोन क्लोनिंग और हैकिंग का मुख्य कारण बनता है।
• WhatsApp टू-स्टेप वेरिफिकेशन: अपने व्हाट्सएप अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए टू-स्टेप वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से ऑन रखें।
4. सोशल मीडिया पर प्राइवेसी बनाए रखें: वर्चुअल लाइक्स और फॉलोअर्स के चक्कर में अपनी हर निजी जानकारी, लाइव लोकेशन या ट्रैवल प्लान सार्वजनिक न करें। अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को हमेशा ‘प्राइवेट’ मोड पर रखें और अनजान फ्रेंड्स/फॉलोअर्स को लिस्ट में शामिल न करें।
5. धोखाधड़ी होने पर क्या करें? (झांसी पुलिस की अपील):
• गोल्डन ऑवर्स (2-3 घंटे) का महत्व: साइबर फ्रॉड होने के शुरुआती 2 से 3 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में त्वरित शिकायत मिलने पर पैसे को अन्य खातों में जाने से पहले फ्रीज कराया जा सकता है।
• हेल्पलाइन नंबर 1930: किसी भी वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
• ऑनलाइन शिकायत: पीड़ित व्यक्ति cybercrime.gov.in पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
• डेटा डिलीट न करें: घबराहट में आकर अपराधियों से जुड़ी चैट्स, स्क्रीनशॉट्स या मैसेजेस को डिलीट न करें, बल्कि उनकी दो कॉपियां बनाकर साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखें।
विशेष नोट: साइबर अपराधों में क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) की कोई सीमा नहीं होती है। पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत किसी भी थाने में दर्ज करा सकता है। जनपद झांसी के सभी 26 थानों में अब समर्पित साइबर सेल कार्य कर रही है, जहां पीड़ित जाकर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
