खुरई-रीवा में जैन आर्यिका माताओं की सड़क हादसे में हुई असामयिक मृत्यु के बाद जैन समाज में भारी आक्रोश और शोक है। खुरई में जैन समाज के हजारों महिला एवं पुरुषों ने जुलूस निकालकर संतों की सुरक्षा की मांग को लेकर एसडीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज ने विहार कर रहे जैन संतों और आर्यिका माताओं की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था किए जाने की मांग उठाई है।
मध्यप्रदेश के रीवा में समाधिस्थ संत आचार्यश्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्यश्री 108 समय सागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिकाश्री 105 श्रुतमति माता जी एवं आर्यिकाश्री 105 उपसममति माता जी का सड़क हादसे में असामयिक निधन हो जाने से पूरे देश की जैन समाज में शोक की लहर है।
इसी घटना को लेकर खुरई जैन समाज द्वारा संतों एवं आर्यिका माताओं की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग को लेकर विशाल जुलूस निकाला गया तथा एसडीएम के नाम नायब तहसीलदार शिवमूर्ति सरल को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में बताया गया कि जैन साधु-संत एवं आर्यिका माताएं आजीवन पैदल विहार करती हैं और किसी भी प्रकार के वाहन का उपयोग नहीं करतीं। वर्तमान समय में सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक और तेज रफ्तार वाहनों के कारण उनके जीवन पर लगातार खतरा बना रहता है। पूर्व में भी इस प्रकार की कई दुखद घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
जैन समाज ने प्रशासन से मांग की है कि संतों के विहार के दौरान विशेष सुरक्षा दस्ता उपलब्ध कराया जाए तथा स्थानीय पुलिस और कोटवारों की ड्यूटी लगाई जाए। साथ ही राजमार्गों पर गति सीमा निर्धारित करने, ‘सावधान, आगे जैन संत विहार कर रहे हैं’ जैसे संकेतक बोर्ड लगाने, रात्रि एवं अलसुबह के विहार के दौरान रिफ्लेक्टिव जैकेट और ब्लिंकर लाइट उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।
इसके अलावा स्थानीय प्रशासन एवं विहार समितियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला एवं पुरुष उपस्थित रहे।
*खुरई से करतार सिंह यादव की रिपोर्ट*
