गुरसरांय (झांसी)। श्री बजरंग मानस प्रचारिणी समिति के तत्वावधान में नगर के पटकाना मोहल्ले में चल रहे श्री राम चरित मानस सम्मेलन के 45 वे अधिवेशन में तृतीय दिवस की कथा में बोलते हुए अयोध्या से आई आचार्या डॉ मांडवी अनुचरी ने कहा कि प्रभु राम हमारे आचरण और हमारे उत्तम विचार में अवश्य विराजमान होने चाहिए। यही उनकी सबसे बड़ी भक्ति है। उन्होंने आदर्श राजा, उत्कृष्ट भाई, श्रेष्ठ पुत्र, महान मित्र की भूमिका एक साथ निभाई तथा एक मानक स्थापित किया। उन्होंने कहा कि प्रभु राम के नाम मात्र से रावण जैसे अत्याचारी का अंत हो जाता है और अंदर के सारे क्लेश पाप और कुविचार समाप्त हो जाते हैं। मन के रावण का अंत करें, स्वत: प्रभु राम की भक्ति मिल जाएगी। अन्याय पर न्याय की जीत के लिए प्रभु श्री राम ने विकट समुद्र को पार कर यह साबित कर दिया कि अन्याय और अत्याचार का हर समय विरोध करना ही मनुष्य का नैतिक कर्तव्य है।
अयोध्या से पधारे संत राम कृष्ण दास जी महाराज ने भगवत भक्ति का बड़े ही मार्मिक ढंग से वर्णन करते हुए कहा कि भगवान बड़े ही सुगम और दयालु हैं अगर भगवान को पाना है तो हमें शबरी और केवट जैसी भक्ति करनी पड़ेगी तभी हम भगवान को प्राप्त कर सकते हैं। शरीर की शोभा कीमती आभूषण और अच्छे वस्त्रों से नहीं होती, शरीर की शोभा भगवान के चरणों में प्रेम करने तथा उनकी भक्ति करने से होती है। आगे उन्होंने कहा कि जीवन का सार तत्व भगवान का भजन ही है इसीलिए परमात्मा ने हमें मनुष्य का जन्म दिया है हमें अपने अच्छे आचरण और श्रेष्ठ कर्मों के द्वारा भगवान की भक्ति करके अपना जीवन धन बनाना चाहिए। राम चरित मानस सम्मेलन के दौरान अयोध्या से आए एक और वक्ता राम कुमार दास जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि सद्गुरु की शरण में जाने से समस्त दुःखो का नाश हो जाता है। हमारे जीवन में जब भी कोई दुःख या विपत्ति आए या कोई भय या चिन्ता सताए तो हमें सांसारिक लोगों को अपना दुखड़ा नहीं सुनना चाहिए ऐसी स्थिति में हमें एक सच्चे सद्गुरु की शरण में जाना चाहिए। क्योंकि सद्गुरु ही एक ऐसा माध्यम है जो हमें सद मार्ग पर लाकर समस्त कष्टों और दुखों का नाश कर देता है। राम चरित मानस सम्मेलन के दौरान वक्ताओं की अगली कड़ी मेंअयोध्या के ही एक और संत बालक दास जी महाराज ने कहा कि बिना भक्ति के भगवान नहीं मिलते अनुराग भाव और भक्ति से ही भगवान की प्राप्ति संभव है। भगवान की कृपा से ही साधु संतों के दर्शन होते हैं साधु संतों के दर्शन से समस्त दुखों का नाश हो जाता है। कार्यक्रम का संचालन रानू तिवारी छिरौरा ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रोता समुदाय उपस्थित रहा।
