झाँसी। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश, जनपद झाँसी इकाई के प्रदेश सचिव बीo बीo गौर, मण्डल अध्यक्ष एसo केo भदौरिया एवं जिलाध्यक्ष मुकेश राजपूत के संयुक्त नेतृत्व में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश व जिलाधिकारी झाँसी को एक विशेष प्रार्थना पत्र प्रेषित किया गया। इस ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीण पत्रकारों ने अपनी समस्याओं व उनके कल्याण से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण माँगें शासन तक पहुँचाई हैं। ग्रामीण पत्रकार समाज लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है, जो समाज की वास्तविकता को सामने लाकर शासन-प्रशासन तक पहुँचाता है। उनकी समस्याओं का समाधान लोकतंत्र व पत्रकारिता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रमुख माँगें- 1.प्रदेश स्तर का भवन: राज्य मुख्यालय लखनऊ में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के लिए भवन की व्यवस्था कराई जाए, ताकि प्रदेश स्तर की बैठकों का आयोजन सुचारू रूप से किया जा सके और संगठनात्मक मजबूती सुनिश्चित हो।
2.आयुष्मान भारत योजना का लाभ: ग्रामीण पत्रकारों को भी मान्यता प्राप्त पत्रकारों के समान आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जाए, जिससे वे व उनके परिवार कैशलेस इलाज का लाभ प्राप्त कर सकें और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित हो।
3.बीमा एवं पेंशन योजना: शासन स्तर से ग्रामीण पत्रकारों को बीमा योजना में शामिल किया जाए। साथ ही, 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्ग पत्रकारों को पेंशन योजना का लाभ प्रदान किया जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से सुरक्षित होकर पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े रहें।
4.अपराध प्रवर्तन व्यवस्था: पत्रकारों के विरुद्ध बिना पूर्व जांच के कोई प्राथमिकी न दर्ज की जाए, ताकि पत्रकार उत्पीड़न की समस्या समाप्त हो और वे निर्भीक होकर जनहित की खबरें उजागर कर सकें।
5.स्थायी समिति एवं नियमित बैठकें: राज्य एवं जिला स्तर पर स्थायी समिति की स्थापना की जाए और तहसील स्तर पर भी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित कराई जाएं, ताकि पत्रकारों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
6.प्राकृतिक आपदा में सहायता: प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना में मृत पत्रकार के परिजनों को किसान बीमा योजना के समान रूप से पाँच लाख रुपये की सहायता दी जाए। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री राहत कोष से बीमित पत्रकारों के परिजनों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाए, ताकि उनकी आर्थिक हालत मजबूती से बनी रहे।
7.फर्जी पत्रकारों पर कड़ी कार्रवाई: अवैध वसूली करने वाले फर्जी पत्रकारों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जिला स्तर पर विशेष बैठक बुलाकर असली एवं फर्जी पत्रकारों की पहचान कर प्रशासनिक रूप से चिन्हित किया जाए।
