गुरसरांय(झांसी)। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय शाखा गुरसरांय द्वारा धूमधाम से रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया गुरसरांय केंद्र प्रभारी बी के कविता दीदी ने सभी को शुभकामनाएँ देते हुए कहा हममें से अधिकतर के लिए रक्षाबंधन का मतलब होता है बहन का भाई को राखी बाँधना,मिठाई खिलाना और उपहारों का आदान-प्रदान करना। लेकिन इस पर्व की गहराई में एक गुप्त और सुंदर आध्यात्मिक अर्थ भी छुपा हुआ है हर आत्मा के अंदर एक गहरी चाहना है: सच्ची सुरक्षा और स्थायी सुख पाने की। यह पर्व हमें बड़े स्नेह से एक गहरा प्रश्न सोचने का अवसर देता है आखिर हमारी सच्ची रक्षा कौन करता है?और हमें स्थायी सुख व शांति कहाँ से मिलती है? रक्षाबंधन का आध्यात्मिक अर्थ और कैसे इसका वास्तविक अर्थ आत्मा को अंदर से सुरक्षित और मजबूत बना देता है।परमात्मा की स्मृति ही हमारी सच्ची सुरक्षा है।जो हमे पवित्र बंधन में बांधती है।प्यार की बोली से सबका जीवन सुन्दर बनाए।अंत मे सभी को परमात्म रक्षासूत्र बांधा गया और मुख मीठा कराया गया। इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित अखिल भारतीय गायत्री परिवार के प्रमुख एडवोकेट सतीश चंद्र चौरसिया ने कहा रक्षाबंधन महापर्व हम भाई बहनों से लेकर हर दीन दुखियों के मददगार बन सके इस भाव से बहिनें रक्षा सूत्र बांधती हैं इसमें एक दूसरे के अलावा साक्षात ईश्वर भी अपनी शक्ति का जन जन को एक नई चेतना इसकी रक्षा से लेकर जीवन सफल हो सके के लिए प्रदान करता है इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अनेकों भाई बहने सम्मिलित रहे।
दिन-भर रक्षाबंधन की चहलकदमी के साथ शाम को निकली कजरिया
शनिवार को नगर सहित ग्रामीण अंचलो में भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन हर्ष,उल्लास और परंपरापूर्वक मनाया गया। मुहूर्त के अनुसार बहिनों ने भाईयों की कलाई मे रक्षासूत्र बाँधकर उनके दीर्घायु जीवन की कामना की। भाइयों ने भी बहिनों की रक्षा का संकल्प लिया। भाइयों ने बहिनों को उपहार भी भेंट किए। भाइयों को स्नेह के सूत्र में बांधने की यह एक बहुत ही हृदय स्पर्शी,भाव भीनी रस्म है। देवी-देवताओं को राखी बांधने की परंपरा का भी बखूबी निर्वहन किया गया। सबसे पहले सुबह आराध्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की गई।राखी व मिठाई की दुकानों पर सुबह से ही भारी भीड़ जुटी रही। भीड़ के चलते कई बार बाजार सहित चौराहों पर जाम की स्थिति रही। बाजारों व चौराहों पर मेले जैसा दृश्य रहा और लोगों ने बढ़चढ़कर खरीददारी की। चौराहों एवं बाजारों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ एकत्र होने लगी जो देर शाम तक यथावत रही। भाई-बहिन के अटूट प्यार का पर्व सोशल साइट्स पर भी छाया रहा। रेशम की डोरी के धागे भले ही कच्चे हो,लेकिन इसके पीछे का स्नेह अटूट और बेहद मजबूत होता है। बहन-भाई के प्यार का प्रतीक इस त्योहार को लेकर घर-घर में व्यापक तैयारियां की गई थी। भाइयों की कलाई रंग-बिरंगी राखियों से सज गई। वहीं दूसरी ओर रोडवेज बसों में महिला यात्रियों की भीड़ अधिक देखी गई है,यह असर महिलाओं को सरकार द्वारा रक्षाबंधन पर्व पर निःशुल्क यात्रा होने के चलते ऐसा देखा गया। शाम के समय कजरिया,जवारे लेकर महिलाएं,पुरुष तालाब माता मंदिर गुरसरांय पूजा अर्चना करने बड़ी संख्या में पहुँचे।
