गुरसरांय(झाँसी)। जिले में बुधवार की रात आई तेज आंधी और तूफान ने न सिर्फ पेड़ों को धराशाही किया, बल्कि आसमान के रंग-बिरंगे परिंदों की भी जान ले ली दरअसल,गुरसरांय के सिंगार गांव में तालाब के पास एक मंदिर है।यहाँ पर एक पीपल का बहुत पुराना पेड़ लगा हुआ है।स्थानीय निवासियों ने बताया कि शाम होते ही पीपल के पेड़ पर हजारों की संख्या में तोते आकर निवास करते थे।गुरसरांय थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिंगार में सुबह का नज़ारा इतना भयावह था कि जिसने भी देखा,उसकी रूह कांप उठी।गांव की गलियों और खेतों में हजारों की संख्या में तोते और मैना मृत पड़ी थीं।हर ओर बेजान पंख और मासूम पंछियों की शव बिखरे पड़े थे।सुबह जब ग्रामीण जागे और बाहर निकले,तो आसमान के ये हरे-पीले परिंदे जमीन पर बेसुध पड़े थे।बताया गया कि गांव के कुछ लोगों ने भी कई तोतों को अपने पास रख कर इलाज देना शुरू कर दिया है।इस हादसे को लेक ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।बच्चों की चीखें गूंज उठीं,और बूढ़े-बुजुर्ग आसमान की ओर देखते हुए बस इतना ही कह पाए”हे भगवन,ये कैसा कहर ?” ग्रामीणों ने मृत पक्षियों को एकत्र कर सिंगार तालाब के माता मंदिर के पास रखा।वहां दृश्य इतना मार्मिक था कि देखने वालों की आंखें भर आईं।चारों ओर भीड़ उमड़ पड़ी।मासूम पक्षियों की मौत पर हर कोई दुखी था।ग्रामीणों द्वारा इसकी सूचना वन विभाग को दी गयी।वन विभाग द्वारा जेसीबी मशीन मंगवाई गई।मंदिर के पास गड्ढा खोदकर हजारों मृत तोतों और मैना पक्षियों को दफनाया गया। खबरें वायरल होने के उपरांत वन विभाग ने दफनाये हुए कुछ पक्षियों को निकालकर उनका पोस्टमार्टम कराया।फिलहाल घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।इसके साथ ही भारी संख्या में हुई पक्षियों की मौत पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।पूरा जिला इस हादसे से स्तब्ध है।तस्वीरें और वीडियोज़ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।लोग दुआ कर रहे हैं कि काश ऐसा मंजर फिर कभी किसी गांव या शहर को न देखना पड़े। सिंगार गांव की वो सुबह शायद ही कोई कभी भूल पाए।
वन विभाग की चूक हुई उजागर
ग्राम सिंगार में 22 मई गुरुवार को सुबह जब तालाब के आस पास से लेकर गाँव से लगे कई खेतों में हजारों तोता-मैना मृत पाए गए तो ग्राम सिंगार सहित आस-पास क्षेत्र में यह खबर बहुत तेजी से फैल गई और आनन-फानन में वन विभाग ने तोता-मैना आदि पक्षियों को दफना दिया गया जब यह खबर वीडियो पर वायरल हुई और मीडिया के लोगों ने वन क्षेत्राधिकारी बामौर अवधेश प्रताप सिंह बुंदेला से दूरभाष पर बात कि तो उन्होंने बताया की दफनाए गए पक्षियों को दफनाने के बाद में फिर से कई घंटो बाद निकालकर पशु विभाग बामौर में पक्षियों का पोस्टमार्टम कराया गया है जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी की पक्षी कैसे और किस कारण मृत्यु हुई है यहाँ सबसे बड़ी कमी वन क्षेत्राधिकारी गरौठा की उजागर हुई है कि बिना पोस्टमार्टम किया पहले पक्षियों को दफना दिया गया अब पोस्टमार्टम बाद में होता है तो कारण पक्षियों के मरने का स्पष्ट कैसे हो पावेगा क्योंकि दफनाने से वास्तविक तथ्य तो स्वत: नष्ट हो गए हैं इसको लेकर आज क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।
