गुरसरांय (झांसी)। तालाब के राम जानकी मंदिर पर श्रीराम महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन रुक्मिणी विवाह के प्रसंग पर श्रोता झूमे।व्यास पंडित भगवत नारायण समाधिया ने भगवान के चीर हरण प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जीवात्मा एवं परमात्मा के बीच मे माया रूपी पर्दा पड़ा रहता है,जिससे जीव के निकट रहते हुए वह परमात्मा को नहीं पहिचान पाता।भगवान ने उसी माया रूपी आवरण का हरण किया और अपने व्यापक स्वरूप का ज्ञान गोपियों के कराया।उन्होंने महारास लीला के वर्णन में कहा कि जीवात्मा एवं परमात्मा का मिलन ही महारास है।रुक्मिणी विवाह के सुंदर प्रसंग में उन्होंने कहा कि लक्ष्मी एवं नारायण शास्वत है।यह दिव्य विवाह प्रसंग लोगो को शिक्षा देने के लिए है।संगीत में कथा में नाल पर देवेंद्र सिंह घोष,ऑर्गन पर प्रमोद गोस्वामी एवं तबले पर धर्मेंद्र कौशिक ने संगत की। मुख्य यजमान श्रीमती कमलेश देवी-अरविंद कुशवाहा,पारीक्षत श्रीमती सावित्री देवी-कन्हैया लाल कुशवाहा,यज्ञाचार्य पंडित लवकुश शास्त्री रहे। इस मौके मनोहर राव नैवालकर,नितुल व्यास,रमेश मौर्य,देवेंद्र यादव पूर्व पार्षद,रविंद्र प्रताप सिंह गौर, पुष्पेंद्र कुमार नायक,
कृष्ण पाल सिंह सेंगर, सुरेश गुप्ता,मुन्नालाल कुशवाहा पूर्व कुशवाहा समाज के अध्यक्ष,अरविंद कुशवाहा,कैलाश कुशवाहा पार्षद,अर्जुन कुशवाहा,नंदू कुशवाहा,किस्सू कुशवाहा,कमल,भज्जू मुखिया, बृजलाल कुशवाहा,अन्नू सेन,सुक्कन,रामकिशोर,घनश्यम कुशवाहा,रामकुमार,
विजय कुशवाहा,रामकिशोर मास्टर,जय सिंह कुशवाहा, अर्जुन कुशवाहा,जयसिंह कुशवाहा,कल्लन कुशवाहा, बृजलाल कुशवाहा,हरिकांत कुशवाहा,मातादीन कुशवाहा, रामकुमार कुशवहा,जानकी कुशवाहा,साधूराम साहू आदि उपस्थित रहे।
