बुंदेलखंड बुलेटिन न्यूज
रिपोर्ट-शौकीन खान/कौशल किशोर गुरसरांय
गुरसरांय (झांसी)। जिम्बाब्वे स्थित इक्रीसेट (ICRISAT) के प्रधान वैज्ञानिक एवं क्लस्टर लीड डॉ. मार्टिन मोयो तथा सिमिट (CIMMYT), मैक्सिको के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सैंटियागो लोपेज-रिडौरा ने बुधवार को टहरौली परियोजना के अंतर्गत ग्राम भड़ोखर और ग्राम नोटा का भ्रमण कर वर्षा जल संरक्षण से जुड़ी संरचनाओं का निरीक्षण किया।इस दौरान वैज्ञानिकों ने ग्राम भडोखर में वर्षा जल संचय हेतु निर्मित हवेली संरचना एवं ग्राम नोटा में सामुदायिक तालाब का अवलोकन कर जाना कि किस प्रकार विज्ञान और तकनीक के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को सुदृढ़ किया जा सकता है।इक्रीसेट हैदराबाद के प्रधान वैज्ञानिक एवं क्लस्टर लीड डॉ. रमेश सिंह ने अतिथियों को परिदृश्य आधारित अभिनव हस्तक्षेपों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्षा जल संरक्षण कार्यों में ग्राम एवं तहसील स्तर पर गठित समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही उन्होंने प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े अन्य प्रयासों की भी जानकारी साझा की।इक्रीसेट के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. कौशल गर्ग ने जल बजट आधारित फसल प्रणाली की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार लैंड रिसोर्स इन्वेंट्री और हाइड्रोलॉजी के आधार पर क्षेत्र में सिंचाई की योजना तैयार की गई है।
डॉ. अशोक शुक्ला (एसोसिएट वैज्ञानिक) ने कृषिवानिकी और जलवायु अनुकूल कृषि प्रणालियों के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि किस प्रकार यह मॉडल किसानों की आजीविका बढ़ाने में सहायक है।
भ्रमण के दौरान अतिथियों ने प्राकृतिक संसाधन संरक्षण समिति के अध्यक्ष आशीष उपाध्याय, रविंद्र सोनी, संजीव बिरथरे, एफपीओ अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह, रामप्रकाश पटेल समेत अन्य निदेशकगणों से चर्चा की।
एफपीओ सलाहकार ललित पटेल ने वैज्ञानिकों को जानकारी दी कि किस तरह रबी एवं खरीफ फसलों की उच्च उत्पादकता वाली प्रजातियों पर कार्य किया जा रहा है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिल रहा है।
इस अवसर पर इक्रीसेट टहरौली टीम के सुनील, शिशुवेंद्र, आनंद, दीपक, ललित किशोर, विजय, सतेंद्र, अनिल सिंह, शैलेन्द्र सोनी, छायाकार पिंटू सहित सहयोगी उपस्थित रहे।
