शरद अग्रवाल पत्रकार दैनिक बुंदेलखंड बुलेटिन जिला ब्यूरो चीफ छतरपुर
छतरपुर/बड़ा मलहरा/बक्सवाहा क्षेत्र में स्थित ओम स्टोन क्रेशर के संचालन में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। क्रेशर संचालक पर्यावरणीय नियमों और सरकारी निर्देशों की अनदेखी करते हुए मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं, जिससे स्थानीय पर्यावरण, कृषि भूमि, मजदूरों के स्वास्थ्य, और सरकारी राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन और अवैध उत्खनन
ओम स्टोन क्रेशर में पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए आवश्यक उपायों का अभाव है। नियमों के अनुसार, डस्ट नियंत्रण के लिए शेड का निर्माण आवश्यक है, लेकिन इसकी अनुपस्थिति में दिनभर उड़ने वाली धूल आसपास की उपजाऊ भूमि को बंजर बना रही है। इसके अतिरिक्त, क्रेशर संचालक निर्धारित लीज क्षेत्र से बाहर अवैध रूप से खनिजों का उत्खनन कर रहे हैं, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, जुझारपुरा में कुछ क्रेशरों की लीज वाली जगहों पर पत्थर समाप्त हो चुके हैं, फिर भी वे अवैध रूप से संचालन जारी रखे हुए हैं।
मजदूरों का शोषण और स्वास्थ्य पर प्रभाव
क्रेशर में कार्यरत मजदूरों से बिना पंजीकरण और बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा है, जो श्रम कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है। इससे मजदूरों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, और उनका शोषण हो रहा है।
प्रशासनिक उदासीनता और माफिया का प्रभाव
हालांकि सरकार ने माफिया दमन दल का गठन कर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं, लेकिन बकस्वाहा में खनिज माफिया बेखौफ होकर अपने गतिविधियाँ जारी रखे हुए हैं। ओम स्टोन क्रेशर संचालक नियमों की अनदेखी कर सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुँचा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं
इनका कहना
भरत पांडे तहसीलदार
नियम विरुद्ध स्टोन क्रेशर के संचालन और लीज से अधिक भूमि में खनन करने की शिकायत मिली है एक माह पहले क्रेशरो का निरीक्षण किया गया था कुछ जगह कमियां पाई गई थी जिसका प्रतिवेदन बनाकर भेजा गया है वही प्रदूषण को रोकने के लिए क्रेशर संचालकों को लिखित में सूचित किया गया है पुनः जांच कराई जाएगी अगर कमियां पाई गई तो कार्यवाही की जाएगी
