बुंदेलखंड बुलेटिन न्यूज
टहरौली तहसील अंतर्गत घुरैया श्री विष्णु महायज्ञ का आयोजन में चलरही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान के नाम की महिमा की कथा का वर्णन किया गया। वह।
भागवताचार्यपूज्य पं. रामेष्ट चतुर्वेदी जी महाराज कथा श्रवण कराते हुए कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार अवश्य दें,तभी वह सच्चा पुत्र बनेगा।उन्होंने ध्रुव चरित्र के माध्यम से कहा कि उनकी मां ने ध्रुव को संस्कार दिए और नारद जैसा गुरु मिला तो उन्हें परम पद की प्राप्ति हुई। कपिल अष्टाध्यायी के माध्यम से अष्टांग योगों का वर्णन करते हुए योग एवं ध्यान की विधि बताई। भगवान के ध्यान लगाने में आसान एवं संगत जीतता बहुत जरूरी है। संतों की महिमा में कहा कि संत सहनशील होते है।जिन्होंने संतों का संग कर लिया उनके जीवन का कल्याण होजाता है।अजामिल के प्रसंग में उन्होंने बताया कि जीवन में पाप आंख एवं कान दो इंद्रियों से शरीर मे प्रवेश करते है,इसलिए आंख से सुन्दर दृश्य देखे एवं कानों से भगवान की मंगलमयी कथा का श्रवण करें।अजामिल ने एक दूषित दृश्य देखा और उसका पतन हो गया। भगवान के नाम की महिमा अपरंपार है।अजामिल ने धोखे से भगवान का नाम लिया और अपना कल्याण कर लिया।
कथा की आरती भागवत यजमान सत्येंद्र सिंह बुंदेला यज्ञ मुख्य यजमान जितेंद्र प्रताप सिंह बुंदेला पूर्व ब्लाक प्रमुख गुरसराय विनोद कुमार पश्तोर गजराज घोष कैलाश नारायण पश्तो र राघवेंद्र बुंदेला समस्त ग्रामवासीय क्षेत्रवासी उपस्थित रहे
