गुरसरांय (झांसी)। नगर के प्राचीन तालाब को सौंदर्यीकरण के नाम पर खाली कर देने से नगर में पेयजल संकट बढ़ने की नौबत आ गई है। इस संबंध में एक सर्व दलीय बैठक का आयोजन पी सी सी सदस्य रमेश मौर्य की अध्यक्षता में किया गया।बैठक में रमेश मौर्य ने कहा कि तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर गर्मियों में खाली कर दिया जाता है,जिससे नगर में जल स्तर का संकट बढ़ जाता है,और आम आदमी को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता है। सीएनडी एफ पर्यटन विभाग उक्त तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर तालाब को खाली करके रखे हुए है,और कच्छप गति से कार्य कर रहा है। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए मेजर अखिलेश पिपरैया ने कहा कि गर्मियों में तालाब को खाली कर देने से नगर का जल स्तर नीचे जा रहा है।यदि नगर में पेयजल की समस्या उत्पन्न हुई तो कार्यदायी संस्था इसकी जिम्मेदार होगी,और सभी नगरवासी जन आंदोलन करेंगे।संचालन अशोक सेन ने किया।बैठक में सूरज माते, घनश्याम नामदेव,छुन्नालाल कोठारी, आजाद मेम्बर,पप्पू ड्राइवर,रम्मू माते,गोपे नन्ना,पिंटू खिरिया,अशोक कुशवाहा आदि उपस्थित रहे।
कागजों में चल रही जल निगम, जल संस्थान,पेयजल योजना दिख रही है फेल
गुरसरांय नगर समेत पूरे क्षेत्र में जल संस्थान द्वारा होने वाली पानी की सप्लाई कई दिनों से कई जगह नहीं पहुंच पा रही है इस विभाग के जिम्मेदार अवर अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता जल संस्थान जानते हुए भी चुप्पी साधे हैं और धरातल पर निगरानी या कोई काम करते जहां नहीं दिख रहे हैं वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपया खर्च करके नमामि गंगे योजना के तहत जल निगम और काम कर रही जियो मिलर फर्म द्वारा गुरसरांय टाउन क्षेत्र में बिछाई गई लाइनों से पानी आम जनता को नहीं मिल पा रहा है तो दूसरी ओर पूरे टाउन क्षेत्र की सड़के बुरी तरह खुदी डली हुई है जिससे आम जनता का चलना दूभर हो गया है वही गुरसरांय नगर में बहुत बड़े भूभाग पर टाउन क्षेत्र में लाइनें अभी तक बिछाई भी नहीं गई है।
मामला यह गुरसरांय का ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड से यह आवाज उठ रही है
आखिर आम जनता अपनी आपबीती किससे कहे और कौन सुनेगा क्योंकि अखबारों से लेकर गरौठा विधायक जहां यह बात संबंधित विभाग तक पहुंचा चुके हैं वही चरखारी के विधायक बृजभूषण राजपूत ने भी मंत्री से लेकर शासन स्तर पर और यह बात दिल्ली दरबार तक पहुंच चुकी है लेकिन धरातल पर कोई भी सुधार ना होना आम जनता के लिए पेयजल का मुद्दा जीवन मरण का सवाल बन गया है लेकिन प्रदेश और जिले के अधिकारी से लेकर ऊपर बैठे जिम्मेदार इस ओर लग रहा है कोई काम नहीं कर रहा है आखिर इसके पीछे क्या वजह है इसको लेकर पूरे बुंदेलखंड में चर्चा बनी हुई है।
