गुरसरांय(झांसी)। नगर के माँ शारदा संगीत विद्यालय में झूलन उत्सव में झूला गीतों की प्रस्तुति ने भाव विभोर किया।संगीत कार पं शिवनंदन प्रसाद वशिष्ठ ने झूला गीत ,झूलन की ऋतु आई अबध सैंया,के द्वारा भाव विभोर किया।संगीतगुरु पं परशुराम पाठक ने ,झूलन में आज सज धज के युगल सरकार बैठे हैं,की प्रस्तुति से मन मोहा,सितार वादक पं सरजू शरण पाठक ने राग देश मे झूला गीत झूलें नवल हिंडोरे की प्रस्तुति दी।तबले पर संगत रामजी सेन ने की।
इसके अलावा आरवी जैन,श्रेया सोनी,नव्यांश सोनी,नेहा पटेल,नमन गौतम ,गार्गी आदि ने झूला गीतों की प्रस्तुति देकर भाव विभोर किया। बताते चलें बुंदेलखंड के जाने माने संगीतकार पंडित परशुराम पाठक और पंडित शिवनंदन प्रसाद वशिष्ठ अपने उम्र के अंतिम पड़ाव पर होते हुए भी उनके द्वारा बेहतरीन राग रागिनियों के बीच झूला गीतों की सावन माह में जो प्रस्तुति दी उसको सुनकर और देखकर कुछ समय के लिए मां शारदा संगीत विद्यालय गुरसरांय में उपस्थित श्रोताओं से लेकर सावन माह में भगवान के झूला महोत्सव में आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कुछ समय के लिए ऐसे शांत व एकाग्र हो गए जैसे साक्षात भगवान यहां आ गए हो और सभी के सभी लोग नाचने थिरकने को मजबूर हो गए पंडित परशुराम पाठक व पंडित शिवनंदन प्रसाद वशिष्ठ जो की उम्र में 85 के पार हैं लेकिन गजब की स्फूर्ति से लेकर संगीत की प्रस्तुति अपने में मौके पर बता रही थी बूढ़े हैं हो तो क्या हुआ इन बुजुर्ग कलाकारों को मां सरस्वती से लेकर ईश्वर का साक्षात वरदान है जिन्होंने इस उम्र में भी आज समां बांध दिया।
बुजुर्ग कलाकारों को शासन से सम्मानित करने की उठी मांग
मां शारदा संगीत विद्यालय गुरसरांय के संस्थापक पंडित सरजू शरण पाठक और जाने-माने बुजुर्ग संगीतकार पंडित शिवनंदन प्रसाद वशिष्ठ जो कि बुंदेलखंड में सबसे प्रसिद्ध संगीतकार हैं और इनके द्वारा जो संगीत के क्षेत्र में लोगों को संस्कार व शिक्षा, कला की हुनर दी है वह शिष्य आज देश व दुनिया में कहीं चोटी के भागवताचार्य और रामचरितमानस से लेकर विभिन्न,धार्मिक,प्रस्तुतियों,संगीत के माध्यम से लेकर बुंदेलखंड और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश सरकार को ऐसे बुजुर्ग संगीतकारों को सम्मानित कर बुंदेलखंड का गौरव बढ़ाने के साथ संगीत को ताजा रखने के लिए एक बेहतरीन कदम होगा। इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार कुंवर राम कुमार सिंह ने क्षेत्रीय विधायक जवाहरलाल राजपूत,अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के अध्यक्ष राज्यमंत्री हरगोविंद कुशवाहा जो हर क्षेत्र के विधि में ज्ञाता है को बुंदेलखंड की पहचान रखने के लिए ऐसे बुजुर्ग संगीतकारों को सम्मानित करना चाहिए।
