शिक्षाधिकारी और शिक्षा माफियाओं की मिलीभगत हो रही उजागर,शासन ले संज्ञान
गुरसरांय(झांसी)। नगर गुरसरांय स्थित महावीर बाल शिक्षा केंद्र इंग्लिश मीडियम एक बार फिर चर्चा और विवादों के घेरे में है।विद्यालय की प्रशासनिक एवं व्यवस्थागत अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद विभागीय अधिकारियों द्वारा जाँच तो कराई गई,लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है। प्रशासनिक ढिलाई को लेकर क्षेत्र के अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है।स्थानीय नागरिकों एवं अभिभावकों के अनुसार,विद्यालय में लंबे समय से मानकों की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें आ रही थीं। शिकायतों का संज्ञान लेते हुए संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर मामले की जाँच की थी।जाँच प्रक्रिया पूर्ण होने के बावजूद विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध क्या कदम उठाए गए,इसका कोई स्पष्ट जवाब अधिकारियों के पास नहीं है।परिजनों का कहना है कि वे अपने बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं,लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों की टालमटोल नीति के कारण विद्यालय की मनमानी पर लगाम नहीं लग पा रही है।जब अधिकारियों की जाँच टीम ने मौके पर पहुँचकर तथ्यों की पड़ताल कर ली थी,तो रिपोर्ट के आधार पर दंडात्मक कदम उठाने में देरी क्यों हो रही है? क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या विद्यालय प्रबंधन को जिले के शिक्षा अधिकारियों से लेकर कही न कही सत्ता में पहुँच होने का लाभ मिल रहा है जिसके चलते देश के भविष्य निर्माता बच्चों के साथ और उनके अभिभावकों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इससे लग रहा है जिस प्रकार जंतर मंतर में नीट की परीक्षा लीक होकर छात्रों का जो आंदोलन हुआ था झांसी जिले के गुरसरांय में भी छात्रों का और अभिभावकों का गुस्सा कही फूट न जाएं। नियमों की अनदेखी के बीच बच्चों की शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा की ज़िम्मेदारी किसकी होगी? क्षेत्रीय नागरिकों और अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक कर संबंधित विद्यालय पर कड़ी कार्यवाही नहीं की गई,तो वे उच्चाधिकारियों का द्वार खटखटाने और आंदोलन करने को बाध्य होंगे।स्थानीय नागरिक/अभिभावकों का कहना है कि यदि जाँच के बाद भी दोषी पर कार्यवाही नहीं होती,तो प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। बताते चले पीड़ित अभिभावक धर्मेंद्र स्वर्णकार द्वारा विद्यालय प्रबंधन पर बच्चों को फर्जी ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) और मार्कशीट,विद्यालय की नवीं से लेकर बारहवीं तक की मान्यता के गंभीर आरोप लगाए गए थे। अभिभावक ने आरोप लगाया है कि विघालय में फायर विभाग की एनओसी भी नही है। अभिभावक ने कहा कि अभी तक इस विद्यालय की जो शिकायतें हुई है उसमें सारी अनियमितताएं साबित होने के बाद प्रभावशाली लोगों के दबाव में सच्चाई पर पर्दा डालकर जांच को फर्जी तरीके से निस्तारण किया गया है जो पीड़ित ने अपने प्रार्थना पत्र में लिखकर अधिकारियों को आपबीती बताई ।
जांच के नाम पर उठ रहे सवाल
विद्यालय में लगातार मिल रही अनियमितताओं की शिकायतों के बाद भी विभाग द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने से अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। अधिकारियों के बुलाने पर अभिभावक धर्मेंद्र सोनी दो बार जिला स्तर पर झाँसी भी जा चुके है।बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब विद्यालय के खिलाफ पहले भी कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं,तो फिर हर बार ‘जांच’ के नाम पर केवल औपचारिकता क्यों की जाती है? अभिभावकों का आरोप है कि इस विद्यालय की मनमानियों और अव्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में कई बार लिखित शिकायतें जिले के उच्चाधिकारियों को सौंपी जा चुकी हैं। इन गंभीर समस्याओं पर अधिकारियों को अवगत कराया गया। लेकिन हर बार शिकायत के बाद जांच कमेटी तो बैठती है,पर नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहता है। जब शिकायतें बिल्कुल साफ हैं,तो विभाग बार-बार जांच के नाम पर समय क्यों काट रहा है? शिकायतों पर ठोस कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि छात्रों के भविष्य से ज्यादा अधिकारियों के लिए कागजी कोरम पूरा करना जरूरी है।इस ढुलमुल रवैये से नाराज होकर स्थानीय समाजसेवियों और अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी जांच को महज एक औपचारिकता बनाकर छोड़ दिया गया,तो वे चुप नहीं बैठेंगे। इस मामले को लेकर जल्द ही जिला मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन और घेराव की रणनीति तैयार की जा रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बार भी पुरानी ढर्रे पर चलता है या फिर कोई निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई करता है।
