बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़:बिना मान्यता के चल रहे स्कूल,दूसरे विद्यालयों की दे रहे टीसी और मार्कशीट
गुरसरांय(झांसी)। क्षेत्र में शिक्षा को व्यापार बना चुके कुछ निजी स्कूलों की एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली करतूत सामने आई है। नियमों को ताक पर रखकर बिना वैध मान्यता के धड़ल्ले से चलाए जा रहे ये स्कूल न सिर्फ अभिभावकों की जेब पर डाका डाल रहे हैं,बल्कि मासूम बच्चों के भविष्य के साथ भी सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। मामला तब उजागर हुआ जब बच्चों को अगली कक्षाओं में प्रवेश के लिए ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) और मार्कशीट बांटी गईं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये दस्तावेज उस स्कूल के हैं ही नहीं,जिसमें बच्चे साल भर पढ़े थे। जानकारी के अनुसार नगर के श्री महावीर बाल शिक्षा संस्कार केंद्र इंग्लिश मीडियम विद्यालय बिना किसी सरकारी मान्यता या कागजी औपचारिकता के स्कूल खोलकर बैठ गए हैं। जब सत्र के अंत में बच्चों को टीसी और मार्कशीट देने की बारी आती है,तो ये संचालक किसी अन्य मान्यता प्राप्त स्कूल से सांठगांठ (सेटिंग) करते हैं। इसके बाद बच्चों को दूसरे स्कूल के नाम से जारी की गई मार्कशीट और टीसी थमा दी जाती है।इसका सीधा मतलब यह है कि बच्चा साल भर जिस स्कूल की बेंच पर बैठा,सरकारी कागजों में उस स्कूल का कोई अस्तित्व ही नहीं है।जब सजग अभिभावक धर्मेंद्र स्वर्णकार उर्फ बल्ले ने अपने पुत्र आशीष स्वर्णकार की मार्कशीट पर किसी अन्य विद्यालय का नाम और सील देखी,तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अभिभावक धर्मेंद्र स्वर्णकार उर्फ बल्ले ने बताया कि”हमने अपने बच्चे को घर के पास वाले स्कूल में भारी-भरकम फीस देकर पढ़ाया। अब जो टीसी मिली है,उस पर 70 किलोमीटर दूर के अल्पाइन पब्लिक स्कूल ग्वालियर रोड झांसी स्कूल का नाम दर्ज है। अभिभावक ने बताया कि अगर कल कोई जांच हुई और यह दस्तावेज फर्जी पाया गया,तो मेरे बच्चे का पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।”इस धोखाधड़ी के कारण बच्चों को आगे किसी बड़े या प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला मिलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसके पहले भी इस विद्यालय मे कई अभिभावकों के साथ इसी प्रकार की धोखाधड़ी कर भारी भरकम अवैध रूप से धन वसूली की जा रही है यहां तक की हाईस्कूल के कई छात्रों के साथ खिलवाड़ किया जा चुका है और तो और शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को पूरी जानकारी होने के बाद भी इस संबंध में कोई सुधार नहीं हो रहा है और शिक्षा विभाग का खुला संरक्षण इस स्कूल के लिए बहुत बड़ा हादसे का इंतजार कर रहा है क्योंकि यहां बच्चों को जिन वाहनों से लाया जाता है वह गैस से संचालित के साथ-साथ काफी मापक विहीन वाहनों से छात्रों को भूसे की तरह भरकर गांव से स्कूल तक लाते हैं इस संबंध में भी पिछले साल लोगों ने बच्चों के भविष्य के खिलवाड़ को लेकर शिकायतें शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासन को की थी लेकिन यहां सब लग रहा है नियम और कानून की जगह सुविधा शुल्क का हुकुम चलता हो। इसी संबंध में गुरसरांय निवासी कुलदीप सिंह ने भी 12 मार्च 2026 को अवैध रूप से अधिक फीस वसूली और और स्कूल के नाम की ओरिजिनल रसीद न देकर धन वसूली की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से की थी लेकिन शिकायत को भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने फर्जी तरीके से निस्तारण कर दिया था इससे लग रहा है कहीं न कहीं सत्ता में धन बल के सहारे छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के साथ बहुत बड़ा धोखा देकर उन्हें लूटा जा रहा है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस संबंध में नगर व क्षेत्र के लोगों ने जनहित व शासन हित में जल्द बड़ी कार्यवाही कर छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के साथ न्याय कर राहत देने की मांग की है। इस संबंध में कक्षा 10 के छात्र के पिता धर्मेंद्र स्वर्णकार ने भी मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज 25 जून को कराते हुए बताया कि इसी विद्यालय में मुझे दूसरे स्कूल की टीसी व मार्कशीट काटकर दी गयी थी और जो रुपया लिए गए है उसकी पक्की रसीद न देकर हस्तलिखित सादा रसीद लिखकर दे दी गई है इसमें बहुत बड़ा घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। धर्मेंद्र स्वर्णकार ने यह शिकायत पोर्टल पर शिकायत संख्या 40016626020498 पर दर्ज कराई है।
गंभीर सवाल:आखिर कब जागेगा शिक्षा विभाग ?
इस पूरे खेल ने स्थानीय शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।क्या विभागीय अधिकारियों को अपने क्षेत्र में बिना मान्यता के चल रहे इन अवैध स्कूलों की भनक नहीं है?या फिर ‘सुविधा शुल्क’ के खेल में जानबूझकर आंखों पर पट्टी बांध ली गई है?दूसरे स्कूल की टीसी जारी करने वाले उन ‘मान्यता प्राप्त’ स्कूलों पर कार्रवाई कब होगी जो इस काले कारोबार में बराबर के हिस्सेदार हैं?अभिभावकों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक से मांग की है कि ऐसे फर्जी स्कूलों को तत्काल सील किया जाए,संचालकों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हो और उन स्कूलों की मान्यता भी रद्द की जाए जो अपनी टीसी दूसरों को बेच रहे हैं।
