गुरसरांय(झांसी)। क्षेत्र में इन दिनों मिलावटी खाद्यान्न और अवैध प्रतिबंधित गुटखे का कारोबार अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। चंद रुपयों के मुनाफे के चक्कर में अनैतिक कारोबारी आम जनता की जिंदगी और सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। ग्रामीण और नगर इलाकों में नकली व मिलावटी दूध,पनीर,मावा (खोया) और सरसों के तेल की सप्लाई धड़ल्ले से की जा रही है,वहीं दूसरी ओर शासन द्वारा प्रतिबंधित और टैक्स चोरी कर लाए जा रहे अवैध गुटखे तथा नकली तंबाकू उत्पादों का जाल लगातार फैलता जा रहा है।स्थानीय जागरूक नागरिकों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार,मिलावटखोरों ने सिंथेटिक दूध और घटिया दर्जे के रसायनों से बने पनीर को बाजार में खपाना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही,गुटखा माफियाओं द्वारा आसपास के बड़े केंद्रों से बिना बिल और टैक्स चोरी के अवैध रूप से गुटखे की बड़ी खेपें मंगवाई जा रही हैं। यह अवैध माल स्थानीय स्तर पर छोटी-मोटी दुकानों और ग्रामीण क्षेत्रों के किराना स्टोर्स तक आसानी से पहुंचाया जा रहा है,जिससे न केवल सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है,बल्कि युवा पीढ़ी भी नशे के गर्त में डूबती जा रही है। वही चर्चा है कि जब कभी सैंपल के नाम पर आने वाली छापेमार टीम की सूचना यहाँ तैनात फ्रूड इंस्पेक्टर द्वारा अवैध कारोबारियों को दे दी जाती है जिससे वह कुछ समय के लिए सावधान हो जाते है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल,स्वास्थ्य पर पड़ रहा बुरा असर
क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत के कारण इन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। कभी-कभार होने वाली औचक निरीक्षण की कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह गई है। बड़े गोदामों और मुख्य सप्लायरों पर शिकंजा न कसे जाने के कारण यह अवैध कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है।चिकित्सकों के अनुसार,मिलावटी खाद्य पदार्थों और घटिया रसायनों से युक्त अवैध गुटखे के सेवन से पेट की बीमारियां,लीवर की समस्या और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए अब स्थानीय समाजसेवियों और जागरूक संगठनों ने मांग की है कि उच्च अधिकारियों को इस मामले का संज्ञान लेकर तुरंत एक सघन चेकिंग अभियान चलाना चाहिए,ताकि मिलावटखोरों और अवैध गुटखा व्यापारियों को बेनकाब कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
