13 फरवरी 2025 को देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित जंतर मंतर की ऐतिहासिक धरती पर बुंदेलखंड के विकास और अधिकारों की मांग बुलंद हुई। इस अवसर पर बुंदेलखंड के सभी जिलों से पधारे आदरणीय ज्येष्ठ-श्रेष्ठ बंधुओं को संबोधित करते हुए बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय बुंदेलखंडी ने कहा कि अब समय आ गया है जब बुंदेलखंड की पीड़ा को राष्ट्र स्तर पर निर्णायक समाधान मिले।
उन्होंने अपने वक्तव्य में स्पष्ट कहा कि बुंदेलखंड की मूल समस्या केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे की उपेक्षा भी है। क्षेत्र में पर्याप्त रेलवे लाइनें नहीं हैं, कई जिलों में सीधी रेल कनेक्टिविटी का अभाव है। सड़क मार्गों की स्थिति कमजोर है, राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों का विस्तार आवश्यक है। रोडवेज सेवाएं सीमित और अव्यवस्थित हैं, जिससे आमजन, छात्र और व्यापारी वर्ग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रवीण पांडेय बुंदेलखंडी ने कहा कि बुंदेलखंड में उच्च शिक्षा संस्थानों, विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों की संख्या आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। तकनीकी, कृषि और चिकित्सा विश्वविद्यालयों की स्थापना अत्यंत आवश्यक है, ताकि युवाओं को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल सकें।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन, रोजगार, रेलवे लाइन, सड़कों का जाल, सुदृढ़ रोडवेज व्यवस्था और उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना — ये सभी मुद्दे प्राथमिकता से हल किए जाने चाहिए।
