समथर (झांसी)-कस्बा समथर के अग्गा बाजार स्थित रामलीला मैदान में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूर्व विधायक दीपनारायण सिंह यादव व पूर्व सांसद चंद्रपाल सिंह के मुख्य आतिथ्य में रामयश प्रचारक रामलीला मंडल के स्मृति शेष रमेश दादू की पुन्य स्मृति में बड़े धूमधाम से लोकगीत व भजन संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें वाहर से आये हुए जय सिंह राजा लोकगीत सम्राट ने अपने कलाकारों सहित एक से एक लोकगीत व भजन प्रस्तुत किए।जिन्हे सुनकर प्रांगण में उपस्थित श्रोताओं ने प्रसन्न मुग्ध होकर तालियों से स्वागत किया। रातभर कलाकार लोकगीत व भजनों की समा बांधे रहे। सभी ने प्रेम लोकगीत व भजनों का सुनने का आनंद लिया। लोकगीत व भजन संध्या का कार्यक्रम संयोजक इंद्रजीत सिंह उर्फ इन्दु यादव के द्वारा आयोजित किया गया।जो हर वर्ष अपने पिता स्वर्गीय रमेश दादू की पुन्य स्मृति में करते हैं। उन्होंने पुष्प माला पहनाकर व स्मृति चिन्ह भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया वहीं लोकगीत सम्राट जयसिंह राजा सहित सभी कलाकारों का पुष्प माला पहनाकर व स्मृति चिन्ह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया।बताया जाता है कि स्वर्गीय रमेश दादू रामयश प्रचारक रामलीला मंडल के विशिष्ट कार्यकर्ताओं में से एक थे। इनका अपने जीवन काल में लम्बे समय तक रामलीला मंडल में जिम्मेदारी, व्यवस्थाओं को बनाना व, रामलीला में पात्रों द्वारा लीलाओं की रैशल कराना आदि में इनका विशेष योगदान रहता था । भगवान श्री राम की रामायण गाथा में इनकी विशेष रुचि थी। बताया जाता है कि ये पुलिस विभाग में कार्यरत थे। लेकिन इनका मन नौकरी में न लगा। और इन्होंने छोड़ दी। और घर पर ही व्यवस्थाएं देखने लगे।रामलीला में इनकी विशेष रुचि थी। इन्होंने रामलीला में ज़िम्मेदारियों का दायित्व तो निभाया ही लेकिन इन्होंने इसके साथ रामलीला में रावण का अभिनय इतना अच्छा निभाया कि आज भी नगर व ग्रामीण क्षेत्र के लोग उन्हें याद करते हैं। और कहते हैं कि दादू जैंसा रावण का संवाद कोई नहीं कर सकता ।जीवन काल के अंत समय तक बे रामलीला में भगवान श्री राम कथा की लीलाओं द्वारा रामायण ग्रन्थ का रसपान करते रहे। उन्हीं के यादगार में लोकगीत भजन संध्या का कार्यक्रम किया जाता है। पूर्व विधायक दीपनारायण सिंह ने भी अपने वाणी से सम्बोधित करते हुए उनकी जीवन कार्यशैली से संबंधित किस्से सुनाये। लोकगीत भजन संध्या कार्यक्रम में रातभर रामलीला प्रांगण में श्रोताओं की भीड़ लगी रही।
