लोकसभा के मानसून सत्र में झांसी-ललितपुर के लोकप्रिय सांसद श्री अनुराग शर्मा ने मानव सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को सदन में उठाया। उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता की आवश्यकताओं और देश के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रश्न पूछे जिनका सीधा संबंध महिलाओं, युवाओं, किसानों और आम नागरिकों से है।
सांसद द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के संदर्भ में यह जानकारी मांगी गई कि झांसी जिले में अब तक कितनी महिलाओं ने इस योजना में पंजीकरण कराया है, लाभार्थियों को कितनी वित्तीय सहायता दी गई है और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में इस योजना की जानकारी और पहुँच बढ़ाने के लिए सरकार ने कौन से कदम उठाए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि पिछले तीन वर्षों में झांसी जिले से कितने आवेदन आए, उनमें से कितने स्वीकृत हुए और कितने खारिज किए गए, साथ ही खारिज होने के कारण क्या रहे। उन्होंने सरकार से यह जानना भी चाहा कि क्या झांसी जैसे आकांक्षी जिलों में इस योजना को और सरल बनाने तथा अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुँचाने के लिए कोई सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार को लेकर भी सांसद ने सदन में महत्वपूर्ण प्रश्न रखे। उन्होंने यह जानना चाहा कि कैंसर से लड़ाई में परमाणु ऊर्जा विभाग और इसके संस्थानों का क्या योगदान है, खासकर उन्नत इलाज और शोध के क्षेत्र में। उन्होंने यह प्रश्न भी पूछा कि अब तक जटिल कैंसर उपचार में क्या उपलब्धियाँ हुई हैं और इस क्षेत्र में किन-किन विभागों के सहयोग की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने यह जानकारी मांगी कि कैंसर शोध में परमाणु ऊर्जा विभाग की देश-विदेश में कौन-कौन सी साझेदारियाँ हुई हैं और उनसे क्या परिणाम मिले हैं।
ग्रामीण युवाओं के लिए शुरू की गई दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना पर भी सांसद ने विशेष ध्यान दिलाया। उन्होंने पूछा कि इस योजना की मुख्य विशेषताएँ और लक्ष्य क्या हैं, पिछले पाँच वर्षों में कितने युवाओं को प्रशिक्षण, मूल्यांकन और नौकरी दिलाई गई है, और “कैप्टिव एम्प्लॉयमेंट इनिशिएटिव” के तहत राज्य और जिला स्तर पर कौन-से कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही सांसद ने यह भी जानना चाहा कि समाज के वंचित वर्गों जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और महिलाओं को योजना से जोड़ने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, खासकर उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में।
जनगणना 2027 को लेकर भी सांसद ने प्रश्न उठाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इसे दो चरणों में करने का प्रस्ताव है और अलग-अलग क्षेत्रों में इसके लिए कौन-सी तिथियाँ तय की गई हैं। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि जनगणना 2027 और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के अपडेट के लिए कितना खर्च प्रस्तावित है। साथ ही उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने जनगणना से पहले NPR अपडेट करने की सूचना दी है, यदि हाँ तो इसके लिए क्या समयसीमा तय की गई है और क्या सरकार ने 2027 से पहले घर-गणना और आवास जनगणना के साथ NPR अपडेट करने का निर्णय लिया है और इसे कब तक पूरा करने की योजना है।
किसानों और महिला किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सांसद ने विकसित कृषि संकल्प अभियान 2025 पर भी प्रश्न पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि इस अभियान के तहत सरकार का किसानों तक पहुँचने का क्या लक्ष्य है, अब तक देशभर में कितने जिला-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं और क्या इस अभियान में ICAR-CIFA की तकनीकों का प्रदर्शन भी शामिल है।
ग्रामीण युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए चल रहे भारत-बैंकर कार्यक्रम पर भी सांसद ने ध्यान दिलाया। उन्होंने यह जानकारी मांगी कि वामनिकोम और सिंजेंटा फाउंडेशन द्वारा चलाए गए इस कार्यक्रम के अंतर्गत कितने युवाओं को लक्षित किया गया है, कार्यक्रम के पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मॉड्यूल में क्या-क्या शामिल है तथा क्या प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और इंटर्नशिप के अवसर भी दिए जाते हैं।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम योजना के अंतर्गत सांसद ने सरकार से यह पूछा कि अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कितना फंड दिया गया है, कितने साइबर फॉरेंसिक-ट्रेनिंग लैब स्थापित हुए हैं और कौन-से राज्य या केंद्र शासित प्रदेश अभी तक ऐसे लैब स्थापित नहीं कर पाए हैं।
सांसद अनुराग शर्मा ने कहा कि वे प्रत्येक सत्र में इसी तरह जनता की मांग और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों को सदन में उठाते रहेंगे। उनका मानना है कि जब तक योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक बैठे हुए लोगों तक नहीं पहुँचता, तब तक उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होता। उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि झांसी-ललितपुर की जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना और आकांक्षी जिलों को विकसित जिलों की श्रेणी में लाना ही उनका मुख्य लक्ष्य है।
