गुरसरांय(झांसी)। मजदूर मीडिया हो रही मजबूर सरकार बताएं क्या है इनका कसूर इस समय हालात असंगठित क्षेत्र के मजदूरों से लेकर मीडिया से जुड़े लोगों के लिए प्रदेश से लेकर केंद्र सरकार तक न तो उनकी आर्थिक समस्याओं के निस्तारण के लिए कोई जनकल्याणकारी योजना धरातल पर है और न ही सुरक्षा से लेकर उनके सम्मान के लिए कोई कदम सरकार द्वारा उठाया जा रहा है ग्रामीण क्षेत्र से लेकर कस्बे व नगरों में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए कोई स्थाई माह भर लगातार मजदूरी मिल सके को लेकर सरकार की गारंटी योजना नहीं है तो दूसरी ओर उनकों इस महंगाई के युग में इतनी मजदूरी भी नहीं मिलती कि वह अपने और अपने बच्चों का भरण पोषण और उन्हें शिक्षा आदि व्यवस्था कर सकें भले ही श्रम विभाग को सरकार ने खोलकर श्रमिकों के पंजीयन उनके कल्याण के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हो लेकिन 80 फ़ीसदी आज भी मजदूरों से लेकर मीडिया के कामों में जुड़े लोगों के सरकार के पास पंजीयन नहीं होते हैं जिससे उनको किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है इस प्रकार कह सकते हैं कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए श्रमिकों और मीडिया का जहां हर प्रकार से मजबूत होना एक अच्छे लोकतंत्र का संदेश जाता है लेकिन लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में खास तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोई कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं यहां तक की पत्रकारों को सही दिशा में कलम चलाने पर उनको धमकाया जाता है और उनका उत्पीड़न किया जाता है ऐसी घटनाएं रोज के रोज हो रही है यहां तक की यूपी में सालों पहले 60 वर्ष से ऊपर उम्र वाले पत्रकारों को पेंशन के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा पत्रावलियां मांगी गई थी और दुबारा पिछले वर्ष पुनः वह पत्रावलियां मांगी गई थी लेकिन आज तक पेंशन पर प्रदेश सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई उल्टी हद पार तो जब हो गई जब उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में कई मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लगातार नवीनीकरण मान्यता कार्डों में से वर्ष 2025 में कुछ लोगों के नवीनीकरण कर कार्ड पत्रकारों को नहीं भेजे गए न ही लिखित किसी प्रकार की सूचना दी गई जबकि लगातार योगी सरकार में यह कार्ड नवीनीकृत होते रहे अब फिर झांसी जिले में यह कार्ड कुछ लोगों के नवीनीकृत कर क्यों नहीं भेजें अथवा इसकी लिखित जानकारी पत्रकारों को क्यों नहीं दी गई और क्या शासन की नई कोई नियमावली है वही उत्तराखंड से लेकर देश के विभिन्न प्रांतो में पत्रकारों को पेंशन या दूसरे रूप में वरिष्ठ पत्रकारों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जा रही है इसी प्रकार मजदूरों को मजदूरी साल में कितने दिन अवश्य मिलना चाहिए और उनकी मजदूरी इस महंगाई के हिसाब से बढ़ना चाहिए के साथ साथ श्रम विभाग को असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पंजीयन कराकर श्रम विभाग उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जो सुविधाएं दी जा रही हैं वह मिलना चाहिए वह नहीं मिल रही है। झांसी जिले के कस्बा गुरसरांय का एक उदाहरण यहां इस प्रकार है की गुरसरांय थाने की पुलिया के पास प्रतिदिन सैकड़ो हजारों मजदूर आते हैं और उन्हें मजदूरी न मिलने पर वह मायूस होकर भाग जाते हैं इस संबंध में कुछ मजदूरों ने मीडिया को बताया कि उनका न तो श्रम विभाग में पंजीयन किया जा रहा है और न ही सरकार से कोई सुविधा मिलती है यह बयान ग्राम बंकापहाड़ी से आये मजदूर संतोष अहिरवार,जितेंद्र,राम चरण,प्रभात,लालू,बलवीर, नीरज,संदीप,महेंद्र सहित कई मजदूरों ने दिए इसी प्रकार मीडिया की ओर से वरिष्ठ पत्रकार कुंवर राम कुमार सिंह व फूल सिंह परिहार ने कहा की लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को जानबूझकर कमजोर करने की दिशा में कुछ लोगों द्वारा काम किया जा रहा है और यहां तक की पत्रकारों को पेंशन सुविधा से लेकर उनके संरक्षण के साथ-साथ समाचार संकलन में किसी भी प्रकार की बाधा ना पहुंचाई जाए इस और धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है जबकि देश के अन्य प्रान्तों में पत्रकारों के संरक्षण से लेकर वरिष्ठ पत्रकारों को उनके कल्याण के लिए और लोकतंत्र की मजबूती के लिए कई कार्यक्रम संचालित हैं इस दिशा में लोकतंत्र को मजबूती के लिए मजदूर और मीडिया के लोगों को मजबूती प्रदान के लिए सरकार को जल्द कारगर कदम उठाना चाहिए ताकि वास्तविक लोकतंत्र की नींव मजबूत हो सके।
