समथर (झांसी) – समथर क्षेत्र के मुस्लिम समाज के लोगों ने बड़े ह्रदय भाव से मनाया मोहर्रम पर्व। सभी इमाम और हुसैन की यादगार में ताजिया निकाल कर उन्हें सजदा किया। कस्बा समथर में आज सुबह से ही मोहर्रम पर्व को लेकर मुस्लिम समाज के बुजुर्ग और जवान लोगों से लेकर नन्हें मुन्ने छोटे बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला। मुस्लिम भाइयों ने सर्वप्रथम नगर के प्रांगण में चौकियों पर स्थित ताजियों के दर पर जाकर अपने खुदा हुसैन को याद कर नमाज़ आदि रस्मों को अदा किया। और उन्हें सजदा कर अपने देश के लिए अमन-चैन और परिवार के लिए सुख चैन व बरक्कत के लिए दुआ मांगी। इसके पश्चात सभी अपने अपने ताजियों को लेकर मुहल्ला कटरा बाजार व अग्गा बाजार में एकत्रित हुए ज़हां मुस्लिम भाइयों ने पर्व की परम्परा गत कुश्ती व शस्त्र आदि के कर्तव्य दिखाएं। वहीं पर्व के उपलक्ष्य में लोगों ने नगर में जगह जगह लंगड़ आयोजित कर मीठा जर्दा, नमकीन, और मिष्ठान आदि वितरण किया। वहीं कुछ लोगों ने मीठा शरवत,टाफी आदि वितरण की।शाम को मुस्लिम भाइयों ने ह्रदय भाव से इमाम हुसैन की यादगार में गाजे बाजे के साथ अपने ताजिया निकाले।ताजियों के साथ साथ अपनी अनोखी छटा बिखेरती हुई गुर्राकें निकली। मुस्लिम भाईयों ने इमाम हुसैन हुसैन की इबादत में या अली या हुसैन के खूब नारे लगाए। वहीं ताजियों के साथ महिलाएं भी मातमी धुनों में गीत गाते हुए निकलीं । ताजिया कटरा बाजार, चौपड़ बाजार, अग्गा बाजार से होते हुए किले के प्रांगण में पहुंचे। वहां से होकर अग्गा बाजार में स्थित रामलीला मैदान में आये जहां सभी ताजिया एकत्रित हुए। जहां चली आ रही मोहर्रम पर्व की परम्परा अनुसार मुस्लिम भाइयों ने कुश्ती,दंगल, अस्त्र शस्त्र आदि के कर्तव्य दिखाएं। वहीं ग्राम साकिन लुहारी के मुस्लिम भाइयों ने भी बड़े ह्रदय भाव से इमाम हुसैन की यादगार में ताजिया निकाले। वहीं नगर व ग्रामीण क्षेत्र में आस्था रखने वाले लोगों ने ताजियों में भाग लेकर धूप अगरबत्ती लगाकर रेवड़ी आदि का प्रसाद लगाकर उन्हें सजदा किया और ख़ुदा इमाम हुसैन की इबादत कर अपने परिवार के लिए सुख चैन और बरक्कत के लिए दुआ मांगी।देर रात तक कार्यक्रम चलता रहा। इसके पश्चात मुस्लिम समाज के लोग ताजियों को कर्बला ले गए। जहां उन्हें दफनाया गया।अर्धरात्रि में ताजियों को कर्बला में ले जाकर दफनाया गया। शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था को द्रष्टि रखते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस मुस्तैद रही।
