गुरसरांय(झांसी)। नगर के पुराने बस स्टैंड पर श्री हनुमान जी व्यास मन्दिर पर आयोजित नौ दिवसीय श्री श्री 108 रामचरितमानस नवाह परायण महायज्ञ के द्वितीय दिवस रामकथा के प्रखर वक्ता महंत रामहृदय दास जी महाराज ने बताया कि धरती पर अधर्म का बोलबाला होता है तब भगवान का किसी न किसी रूप में अवतार होता है।भगवान चारों दिशाओं में विद्यमान है। इन्हें प्राप्त करने का मार्ग मात्र सच्चे मन की भक्ति ही है। उन्होंने कहा कि भगवान सर्वत्र व्याप्त है। प्रेम से पुकारने व सच्चे मन से सुमिरन करने पर भगवान कहीं भी प्रकट हो सकते है। भगवान राम के जन्म की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि संत कृपा के तप से भगवान ने राजा दशरथ व रानी कौशल्या के घर जन्म लिया। भगवान राम के जन्म की व्याख्या के दौरान जैसे ही कथा व्यास ने भजन गाया वैसे ही श्रोता झूम उठे। उन्होंने धर्म और संप्रदाय में अन्तर को समझाते हुए बताया कि धर्म व्यक्ति के अंदर से एकजुटता का भाव पैदा करता है वहीं सम्प्रदाय व्यक्ति को बाहरी रूप से एक बनाता है। आगे उन्होंने मनुष्य की चार प्रजाति बताई। प्रथम नर राक्षस जो सदैव दूसरे को नुकसान पहुंचाता है। दूसरा नर पशु ये मनुष्य अपने जीवन को निरीह प्राणी की तरह जीते हैं। तीसरा सामान्य नर ये अच्छा जीवन यापन करते हैं एवं अच्छे संस्कार के होते हैं लेकिन न तो किसी अच्छे का साथ देते है न तो बुरे लोगों को उनके कर्मों में रोकने का प्रयास करते हैं। चौथे प्रकार का मनुष्य सबसे उत्तम प्राणी होता है वह अपने जीवन से परोपकार,धर्म व संस्कार,दूसरों की चिंता करता है।इसके पूर्व सुबह नवाह परायण महायज्ञ में श्रृद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कथा की आरती पं बृजकिशोर व्यास,विनोद व्यास,सुरेंद्र व्यास ने संयुक्त रूप से की।इस अवसर पर पं देवेश पालीवाल,डॉ डी आर सिंह,सतीश चौरसिया,रामनारायण पस्तोर,सूरज माते,महेंद्र व्यास,नरेंद्र व्यास,अतुल व्यास,नितुल व्यास,रामजी व्यास,डॉ नरेश तिवारी,अनिल तिवारी,दिनेश त्रिपाठी,हेमंत गोस्वामी,सनद अग्रवाल,कौशलेश मिश्रा,टिंकू नायक,रजनीश त्रिपाठी,देवेंद्र घोष,रघु त्रिपाठी,सुरेंद्र अग्रवाल,कैलाश अग्रवाल,शशिकांत पस्तोर सहित सैकड़ो की संख्या में धर्मप्रेमी मौजूद रहे।
