गुरसरांय(झांसी)। नगर में आवारा जानवरों की सुविधा के लिए सरकार द्वारा पशु चिकित्सालय खुले हुए हैं जिससे कि पशुओं को बेहतर इलाज मिल सके,लेकिन गुरसरांय नगर में ज्यादातर पशु भूख और प्यास से बेहाल होकर दम तो तोड़ ही रहे हैं, लेकिन कुछ पशु इलाज के अभाव के कारण दम तोड़ रहे हैं क्योंकि कुछ नेक इंसान पशुओं का इलाज कराने के लिए उन्हें अस्पताल तक लेकर पहुंच तो जाते हैं लेकिन वहाँ अपनी कुर्सी पर न तो डॉक्टर साहब मिलते हैं,और न ही दवाइयाँ सिर्फ फार्मासिस्ट के भरोसे ही इस पशु चिकित्सालय में इलाज किया जा रहा है,जब इलाज हो जाता है तो उन्हें लिखकर एक पर्ची थमा दी जाती है, और कहा जाता है,की बाहर से दवा ले लो पैसों के अभाव के कारण नेक इंसान दवाई नहीं लेते हैं जिससे बेहतर इलाज न मिल पाने के कारण आवारा पशु दम तोड़ देते है। बताते चले कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि गोवंशों से लेकर पशुपालन को संरक्षण से लेकर बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके इसके लिए भारी भरकम बजट देकर पशुपालन विभाग को एंबुलेंस से लेकर दवाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा को मजबूत किया गया है लेकिन सरकार के द्वारा सभी सुविधाएं देने के बाद भी पशुपालन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सरकारी योजनाओं का मजाक उड़ाया जा रहा है।
वही जब इस सम्बन्ध में पशु डॉक्टर प्रशांत सिंह से बात की गई की आप अस्पताल में कुर्सी पर क्यों नहीं बैठे है तो डॉक्टर साहब ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया की डॉक्टरों को बहुत काम होते है,इसलिए नहीं बैठ पाते,जब पूँछा गया की दवा क्यों नहीं मिल रही है तो उन्होंने कहा की दवा आती नहीं है, इसलिए बाहर से लिख देते है।अब ऐसे में जब नेक इंसान 300 रूपए की दबा बाहर से खरीदेगा तो कैसे इन जानवरों की जान बच पाएगी अब देखना होगा की पशु चिकित्साधिकारियों द्वारा क्या कार्यवाही अमल में लाई जाती है।
