गुरसरांय(झाँसी)। अपनी ढपली अपना राग विकास के नाम पर दिख रहा कोरा काज चाहे स्थिति गुरसरांय में तालाब माता मंदिर निर्माण और सुंदरीकरण की हो चाहे धनाई तालाब अवैध कब्जा धारियों से मुक्त करने का हो यह सब के सब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा करोड़ों रुपया खर्च करने के बाद भी योजनाएं धरातल पर उतरती हुई नहीं दिख रही है जिसके पीछे स्पष्ट संदेश जा रहा है कि अधिकारियों से लेकर संबंधित विभाग की कार्यदायी संस्था केवल जनता और सरकार का धन का दुरुपयोग करने में लगे हुए हैं और तो और मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी भी इस और समय रहते ध्यान नहीं दिया गया है जिसके चलते सभी योजनाएं उसी प्रकार है जैसे आसमान से गिरी और खजूर पर लटकी
मडी में अव्यवस्थाओं का जिम्मेदार कौन?
गुरसरांय कृषि उत्पादन मंडी समिति में यहां तैनात अधिकारियों की पोल स्वयं मंडी प्रशासक ने मंडी के बाहर अवैध कारोबारियो द्वारा बिना कागजों के खरीद करते एक व्यापारी को पकड़ा था जिस पर 23000 रुपया लगभग जुर्माना वसूल किया गया था इस व्यापारी के पास कोई भी कागज मौजूद नहीं थे और मंडी के सचिव से लेकर सारे कर्मचारी वहीं मौजूद 24 घंटे बने रहते हैं लेकिन अवैध कारोबार को संरक्षण देना स्पष्ट प्रतीत होता है तो दूसरी ओर मंडी के अंदर बढ़ रही चोरियों का कारण वहां पर बी रोकटोक दिन-रात लोगो और अराजक तत्वों का आना जाना है हालत है मंडी परिसर की आबादी से लगी बाउंड्री बाल जगह-जगह टूटी पड़ी हुई है और मंडी प्रशासन द्वारा इस संबंध में दीवाल निर्माण ना कर कर व्यापारियों से लेकर किसानों के लिए मुसीबत पैदा कर रहे हैं जगह-जगह दीवाल ना होना यह फोटो अपने में खुद प्रमाण दे रही है।
तालाब का बंद पड़ा काम तस्वीर क्या इशारा कर रही है
ऐतिहासिक तालाब माता मंदिर गुरसरांय में सालों से लगभग तीन करोड़ रुपया लागत से सुंदरीकरण और विस्तरी कारण होना था लेकिन समय सीमा निकालने के बाद भी आज 14 अप्रैल तक यहां पर काम बंद पड़ा हुआ है और तालाब खाली पड़ा है तालाब के अंदर बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं इस तालाब से पूरे गुरसरांय में जल स्तर बढ़ता था और आमजन के लिए यही तालाब बहु उपयोगी था लेकिन भीषण गर्मी में भी यह तालाब सूखा पड़ा हुआ है हद हो गई विभाग से लेकर प्रशासन ऐसा दिख रहा है की प्रशासन नाम की यहां पर कोई चीज नहीं है क्या यूपी में विकास का मॉडल इसी तरह कागजों में दिख रहा है वही गुरसरांय की दूसरे धनाई तालाब पर भी न्यायालय और शासन की आदेश के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गरौठा विधायक के प्रयास से 50 लाख रुपया इस तालाब को अतिक्रमण हटाने से लेकर बिस्तारीकरण के लिए कई महीनों पहले दे दिया गया है लेकिन राजस्व भिभाग से लेकर कार्य करने कराने वाले सब के सब इस और चुप्पी सादे हुए हैं जिससे पूरे नगर की भयावह स्थिति जल संकट को लेकर भीषण गर्मी में बन गई है।
