गुरसरांय (झांसी)। किसानों को उनकी उपज का सही रेट मिल सके इसके लिए सरकार ने भले ही विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से मंडी परिसर गुरसरांय में और गरौठा,बामौर,एरच आदि जगह जहां खरीद केंद्र खोले हैं लेकिन किसानों की उपज का सरकारी खरीद केन्द्रो पर गेहूं बेचने के लिए फोकस कम है क्योंकि इन खरीद केन्द्रो पर भुगतान से लेकर किसानों को गेहूं बेचने के लिए अपने नंबर लगाने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। और फिर किसानों को भुगतान में भी विलंब होता है तो दूसरी ओर गुरसरांय नगर में मंडी प्रशासन की मिली भगत के चलते मंडी के बाहर बड़ी संख्या में अवैध कारोबारी गेहूं का कारोबार कर रहे हैं इनका कहीं न कहीं मंडी स्टाफ से सुविधा शुल्क बधा हुआ है ऐसी चर्चाएं है जिसके चलते किसानों को मजबूरन पैसों की आवश्यकता होने पर इन्हीं अवैध कारोबारियों को अपना गेहूं बेचने को मजबूर होना पड़ता है और लगातार कई बार तो ऐसे व्यापारियों ने बड़ी संख्या में किसानों को उनकी उपज खरीद का भुगतान ही नहीं किया गया है ऐसा मामला सालों पहले गुरसरांय थाना में दर्ज है तो अवैध कारोबारी का दूसरा गुरसरांय मंडी क्षेत्र का मामला एरच थाने में दर्ज है जिसमें विभिन्न प्रकार की उपजें इन अवैध कारोबारियों में ऊंचे दाम का लालच देकर खरीदा था लेकिन सब कुछ मंडी प्रशासन से लेकर जिले के आला अधिकारियों को मालूम होते हुए भी इस ओर ध्यान न देना स्पष्ट करता है कि प्रशासन कहीं अवैध कारोबारियों को संरक्षण दे रहा है। उधर गुरसरांय मंडी में 9 अप्रैल तक 8634 कुंतल गेहूं आर०एफ०सी के क्षेत्रीय विपणन अधिकारी अखिलेशचंद द्विवेदी द्वारा गुरसरांय मंडी खरीद केंद्र पर खरीदा गया है और 10781 कुंतल एफसीआई के करण सिंह द्वारा खरीदा गया है और 7000 कुंतल आर०एफ०सी द्वितीय आशीष द्वारा तो पीसीएफ नारायणपुरा द्वारा 3150 कुंतल गेहूं खरीदा गया है वही गुरसरांय मंडी परिसर में पीसीएफ द्वारा चना,मसूर,सरसों,अरहर का खरीद केंद्र खोल जरूर गया है लेकिन इसमें किसानों की जगह अवैध कारोबारियों की माध्यम से चना,मसूर आदि की खरीद होना चर्चा का विषय बना हुआ है 10 अप्रैल को जब मीडिया के लोग मंडी परिसर के इस पर खरीद केंद्र पर पहुंचे तो यहाँ कोई भी जिम्मेदार विभाग का कर्मचारी मौजूद नहीं था और चर्चा है कि इस खरीद केंद्र पर वही सफेद पोश संरक्षण में लगे लोग अवैध कारोबार करने बालों के साथ ही चना,मसूर,सरसों आदि का किसानों की ओट में यहां सरकार के बड़े हुए दामों का बंदरबांट नीचे से लेकर ऊपर तक करते नजर आ रहे हैं जिन्होंने अभी कुछ दिन पहले मूंगफली के नाम पर कारोबारियों से मिलकर भारी मुनाफाखोरी की थी और खाद बिक्री में भी काफी कालाबाजारी उनकी चर्चा में रही थी लेकिन कहीं ना कहीं सत्ता की हनक के चलते इनके खिलाफ प्रशासन से लेकर आला अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई ना होना एक तरफ सरकार की मंशा अनुरूप वास्तविक किसानों की चना,मसूर,सरसों की खरीद नहीं हो पा रही है अब देखना है संबंधित विभाग के आला अधिकारियों से लेकर प्रशासन और शासन इस संबंध में क्या कार्रवाई करता है।
