बुंदेलखंड बुलेटिन न्यूज़
- ग्रामीण किसान से रिश्वत का पैसा लेने के बाद भी नहीं भेजा गया अतिवृषष्टी का पैसा….
ललितपुर। खरीफ के सीजन में जनपद में खराब चल रहे मौसम के बीच अतिवृष्टि होने के कारण शासन ने किसानों को उनकी खराब हुई फसलों के मुआवजा दिलाने का कमा भी किया था। लेकिन अब तक कई किसानों के खातों में अति बृष्टि का पैसा नहीं आने के कारण वह लगातार परेशान है और राजस्व विभाग के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों के भी चक़्कर लगा रहे हैं। लेकिन कुछ राजस्व विभाग के लेखपाल किसानों से पैसा दिलाने के एवज में रिश्वत ले लेते हैं पर उनके खातों में पैसा नहीं आता, जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे ही एक मामले में गांव में तैनात एक लेखपाल ने किसान से अतिवृषष्टी का पैसा खाते में भेजने के एवज में उसे घूस की रकम तो ले ली, लेकिन उसके खाते में पैसा नहीं आया। जिससे परेशान किसान ने जिला प्रशासन को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की जांच करवा कर राहत राशि का पैसा उनके खातों में भिजवाने एवं घूसखोरी लेखपाल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की मांग उठाई। तहसील महरौनी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम भौरदा निवासी बुजुर्ग किसान हल्का पुत्र स्वामी सोमवार को क्लैक्ट्रेट परिसर में उपस्थित हुआ, जहां उसने अपने ही गांव में तैनात लेखपाल पर आती दृष्टि का पैसा दिलाने के नाम पर एक हजार रूपये की रिश्वत लेने के आरोप लगाए। उक्त मामले को लेकर उसने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर पूरे मामले की जांच पड़ताल कार्यवाही की मांग उठाई। जिला प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में किसान ने अवगत कराया है कि खरीफ के सीजन में उसने अपने खेतों में उड़द की फसल बोई थी, लेकिन इस मौसम में जब फसल तैयार हुई, तभी ओलावृष्टि और अतिबृष्टि हुई, जिस कारण उसकी उडद और अन्य फसले खेतों में ही जमीन दोज हो गई थीं। अतिबृष्टि और ओलावृष्टि के कारण योगी सरकार ने उन्हें मुआवजा राशि देने का वादा किया था, ताकि किसान आगामी फसल को सफलतापूर्वक कर सके। लेकिन उसे अब तक खरीफ की फसल का मुआवजा नहीं मिल पाया है। मुआवजा की पड़ताल करता हुआ जब वह अपने गांव में तैनात महिला लेखपाल के पास पहुंचा, तब महिला लेखपाल ने उसकी बात सुनकर जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने का वादा किया और मुआवजा दिलाने के एवज में एक हजार रूपये की रिश्वत पहले ही ले ली थी। अपनी खराब हुई फसल का मुआवजा लेने के लिए वह अब अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
