गुरसरांय (झांसी)।माँ शारदा संगीत विद्यालय में संगीतगुरु पं परशुराम पाठक के सानिध्य में राष्ट्रीय कथा व्यास एवं शास्त्रीय संगीत के गायक पं बृजेश त्रिपाठी द्वारा राग रागनियों की प्रस्तुति ने मंत्र मुग्ध किया।उन्होंने विचित्र रागों की प्रस्तुति देकर उनके बारे में समझाया।सबसे पहिले उन्होंने राग कोमल ऋषभ आसावरी में तीन ताल की बंदिश मैं तो तुम्हरो दास जन्म जन्म को ,सुनाकर भाव विभोर किया।इसके बाद राग गावती में परम सुकृत तिय नैन भयो रे की शानदार प्रस्तुति दी।तबले पर संगत पं सरजू शरण पाठक ने की।अंत मे उन्होंने राग झिंझोटी में तीन ताल की प्रस्तुति देकर मंत्र मुग्ध किया।उन्होंने कहा कि ऐसे रागों को कम गाया जाता है।युवा पीढ़ी रागों का अध्ययन करती रहे,जिससे शास्त्र का विस्मरण ना हो।संगीत की विद्या के लिए गुरु कृपा समर्पण अति आवश्यक है।संगीत की बारीकियों को समझने के लिए गुरु मुख होकर ही संगीत की साधना करें।इस संगीताचार्य पं शिवनंदन प्रसाद वशिष्ठ,ओपी शर्मा,ठाकुरदास तिवारी,द्वारिका प्रसाद भगत ,शैलेंद्र शर्मा आदि उपस्थित रहे।
