गुरसरांय(झांसी)। मुझसे क्या भूल हुई जो यह सजा मुझको मिली यह गीत उत्तर प्रदेश सरकार बनाने में बुंदेलखंडवासियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका खरी उतर रही है। बुंदेलखंड के गरौठा समथर विधानसभा क्षेत्र से लेकर पूरे बुंदेलखंड में किसान,मजदूर,गरीब और आमजन इस समय जहां बिजली के स्मार्ट मीटर लग जाने से लेकर लोगों द्वारा पूरे विद्युत बिल बकायेदारी जमा करने के बाबजूद विद्युत विभाग द्वारा नोड्यूस न देने से विद्युत उपभोक्ताओं के खिलाफ दर्ज मामलों में न्यायालय के चक्कर काटना पड़ रहा है और जनप्रतिनिधि से लेकर विद्युत विभाग के आलाधिकारी और शासन स्तर से ऐसे मामलों में कोई सुनवाई मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद भी निराकरण नहीं हो रही है और अधिकारी झूठी रिपोर्ट लगाकर आम जनता को तंग कर रहे हैं और सरकार को गुमराह कर रहे हैं। जबरिया स्मार्ट मीटर लगा देने से आम आदमी की आर्थिक स्थिति जो कमजोर थी उसको ओर हिलाकर रख दिया है यहां तक कि जितने में साधारण मजदूर आम आदमी का परिवार का गुजारा होता था उतना अब विद्युत बिल आ रहा है और लग रहा है शासन,लोकतंत्र,मानवता कानून नाम की पूरे क्षेत्र में कोई जगह ही नहीं बची है। दूसरा मामला किसानों की खरीफ की फसल 2025 में गरौठा विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश जगह तबाही हो गई है उसमें गरौठा विधानसभा क्षेत्र से लेकर बुंदेलखंड का बहुत बड़ा भूभाग आता है लेकिन सरकार द्वारा आपदा राहत राशि किसानों को नहीं दी गई और अफसरशाही के चलते नेताओं के कोरे भाषणबाजी के चलते बेलगाम अधिकारियों और बैंकों से लेकर दलालों ने कृषि विभाग आदि अधिकारियों से मिलकर चालू किस्म के लोगों ने जहां बीमा क्लेम दूसरों के हड़प लिए हैं यहां तक कि झांसी ललितपुर के सांसद को भी नहीं बख्शा तो दूसरी ओर महोबा,हमीरपुर जिला और झांसी जिले के गरौठा विधानसभा क्षेत्र में भी यह सब खेल चला। अब बारी आती है बुलदेखंड में सरकार की बड़ी हुई दरों पर उपज खरीदने का तो गुरसरांय मण्डी से लेकर हर जगह इसमें दलालों का खेल बहुत आगे रहा है वर्तमान में कृषि उत्पादन मण्डी समिति गुरसरांय के अंदर सालों से जो मण्डी में दुकान खोले हुए हैं वहां पर किसानों की आवक कम हो गई है कारण किसानों की मजबूरी देखते हुए गुरसरांय मडो़री रोड,गुरसरांय मऊ रोड,गुरसरांय मोठ रोड, गुरसरांय एरच रोड पर अवैध गल्ला कारोबारियों ने नगद दाम का लालच देकर औने-पौने दाम में किसानों की उपजों को खरीदना जारी रखे हुए है और इसकी जानकारी मण्डी प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन को होने के बाद भी कार्यवाही न होना किसानों की दुर्गति के लिए लग रहा है कहीं न कहीं सत्ता का संरक्षण अपने में इशारा करता है आम जन की बात कहें तो कई सालों पहले गरौठा-गुरसरांय समेत पूरे बुंदेलखंड में अरबों रुपए की हर घर नल हर घर जल योजना से पानी पहुंचना चालू हो जाना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ। गुरसरांय नगर पालिका के टाउन क्षेत्र के पच्चीस वार्डों की स्थिति धरातल पर देखी जाए तो मजाक बनी हुई है। और गुरसरांय टाउन क्षेत्र में जल निगम द्वारा जियो मिलर कंपनी द्वारा जो काम कराया जा रहा है वह पच्चीस प्रतिशत भी पूरा नहीं हुआ है उल्टे पूरे टाउन क्षेत्र की सड़के खोदने से आए दिन दुर्घटना बढ़ रही हैं। और हालत यह है कि जनता भीषण गर्मी में तड़पड़ा रही है क्योंकि तीन सालों से गुरसरांय तालाब सुंदरीकरण के नाम पर खाली डला हुआ है जिससे पूरे नगर के हैंडपंप जवाब देने लगे हैं और जल स्तर गिर जाने से पानी की हाय हाय मची हुई है और जो पानी का जल स्तर गिरा है उससे जहां कहीं हैंड पंपों से थोड़ा बहुत पानी आता भी है तो वह बहुत कम और खारा होने से पीने लायक ओर इस्तेमाल के लिए उपयोगी नहीं है। मामला यहीं नहीं रुकता गुरसरांय से मोठ जाने के लिए जो इंदी सेमरी होते हुए खिरिया घाट पुल तक सड़क बनी थी उसको जानबुझकर उत्तर प्रदेश शासन से लेकर जनप्रतिनिधियों ने चौड़ीकरण नहीं कराई न सुंदरीकरण कराया और मरम्मत के नाम पर भारी भरकम बजट का दुरुप्रयोग हुआ है। इस सड़क की स्थिति भी मौके पर देखने से लग रहा है कि सड़क ही गायब हो गई है। और बरसात के दिनों में गुरसरांय से सेमरी इंदी की अधिकतम दूरी 4 किमी होगी और कोई बीमार हो जाता है तो उसे उल्टा बेंदा होकर बघेरा होते हुए गुरसरांय ईलाज कराने के लिए आना पड़ता है। वहीं एरच डिफेंस कॉरिडोर का भाजपा शासन काल का दूसरा चरण भी पूरा होने को है लेकिन लग रहा है कि भाजपा शासन काल में यह सब नहीं हो पाएगा और तो ओर गुरसरांय नगर का धनाई तालाब के लिए 50 लाख रुपए सफाई चौड़ीकरण के लिए आए थे लेकिन सालों से रुपया अटका हुआ है और उच्चतम न्यायालय के आदेश शासन के आदेश की तालाबों से अवैध कब्जे हटाए जाएं लेकिन अवैध कब्जा हटाना तो दूर जितना हिस्सा बचा है उसकी भी सफाई और मरम्मत सुंदरीकरण प्रशासन नहीं करवा पाया यह पूरा मामला प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों की निगाहों में है लेकिन सुनने वाला कोई नहीं। इससे लग रहा है ओर जनता कह रही है ऐसी चर्चा है कि हम से क्या भूल हुई जो सजा सरकार ने हमको दी है। कुल मिलाकर भले ही गरीब मजदूर आम जनता से लेकर पत्रकारों की आवाज सत्ता के बल पर दबा दी जाए या ऐसी आवाजें उठाने वालों के खिलाफ सरकार या प्रशासन कार्यवाही करे लेकिन लग रहा है जनता है ये सब जानती है इसका हिसाब 2027 में जनता क्या देती है वो तो राम जाने।
