आज 1 अप्रैल 2026 को शहीद रामचंद्र विद्यार्थी प्रजापति जी का जन्मोत्सव बड़ी ही धूमधाम से कचहरी परिसर जिला झांसी में समस्त अधिवक्ता गणों द्वारा मनाया गया। कार्यक्रम में उनके जीवन परिचय, क्रांतिकारी इतिहास, संघर्ष और वीर गाथाओं पर उपस्थित अधिवक्तागण द्वारा प्रकाश डाला गया।
रामचंद विद्यार्थी प्रजापति जी का जन्म 01अप्रैल 1929 को ग्रह जनपद देवरिया के ग्राम नौतन हथियागढ में एक प्रजापति परिवार में हुआ। इनकी माता का नाम मोती रानी और पिता का नाम बाबूलाल प्रजापति था । इनके परिवार में मिट्टी के बर्तन ( कुम्हारी कला ) का काम किया जाता था। राम चंद्र विद्यार्थी के अंदर बचपन से ही हिम्मत,साहस,जोश जज्बा,त्याग,स्वाभिमान और कुछ कर दिखाने की अद्भुत क्षमता और संगठनात्मक झमता कूट कूट कर भरी थी। जब वो कक्षा सात में पढ़ रहे थे,उसी समय महात्मा गांधी जी के आवाहन पर” अंग्रेजों भारत छोड़ो ” का आंदोलन 9 अगस्त 1942 को शुरू किया गया। सारे देश में स्वतंत्रता आंदोलन की गूंज फैलने लगी।उसी समय दिनांक। को नौनिहाल प्रजापति राम चंद्र विद्यार्थी ने ( उम्र मात्र तेरह वर्ष 14दिन ) 9 अगस्त 1942 को देश की आजादी हेतु अंग्रेजी शासन से टकराने के लिए देवरिया तहसील पहुंच गए और अपने सहपाठियों के बने पिरामिड के सहारे चढ़कर तहसील में लगे अंग्रेजी हुकूमत के झंडे को उखाड़ कर अपने हाथ में लिए तिरंगे को गाड़ने का प्रयास करने लगे और अपने सहपाठियों के साथ भारत माता के जयकारे के नारे लगाना शुरू किया।यह देखकर ब्रितानियों की पुलिस आश्चर्य चकित होकर रामचंद्र विद्यार्थी को चेतावनी देते हुए बहुत समझाने का प्रयास किया, लेकिन भारत माता के वीर सपूत पर चेतावनी का कोई असर पड़ता न देख अंग्रेजी परगना अधिकारी उमराव सिंह के आदेश पर पुलिस द्वारा उनके सीने में लगातार गोलियों की बौछार कर दी, लेकिन देश दुनिया के सबसे कम उम्र के इस जांबाज क्रांतिकारी बालक अपने सीने में हंसते हुए गोली खाकर भी अंग्रेजी हुकूमत के सामने न डरा,न हटा और न ही विचलित हुआ और अपने देश के तिंरगे को तहसील के प्राचीर में अंग्रेजी हुकूमत के सामने फहराने के बाद इस अशंका से कि कहीं हमारी आन बान और शान का प्रतीक तिरंगा झंडा कही गिर न जाए, गोलियां खाते हुए भी अपने शरीर की ढाल बनाकर उसे गिरने नहीं दिया और इसी प्रयास में वो मौके पर ही शहीद हो गए। इस वीर नौनिहाल बालक के इस अदभुत साहस, त्याग और बलिदान को देखकर अंग्रेज आफीसर और अंग्रेजों की पुलिस भी हैरत में पड़ गए। परिणाम स्वरूप और अपने देश के प्रति नौनिहाल बालक की इतनी दिवानगी और प्रेम को देखकर उनके सम्मान में सलामी देते हुए अश्रुपूरित ससम्मान श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।
ऐसे क्रांतिकारी शहीद वीर बालक को समस्त भारतवासी शत् शत् नमन और वंदन करते हैं ।
