उरई/जालौन। मैत्री बुद्ध विहार बघौरा उरई में बुद्ध धम्मदेशना कार्यक्रम के तीसरे दिन तथागत गौतम बुद्ध के संन्यास के जीवन एवं उनके ज्ञान प्राप्त करने तक की कथा संगीतमय गायन से बहुजन गायक अरविंद बौद्ध ,विशाखा बौद्ध ने लोगों को सुनाया ,प्रांगण मे बैठे महिलाएं बच्चे भगवान बुद्ध की कथा सुनकर झूम उठे। भदंत शीलानंद ने कहा कि भगवान तथागत बुद्ध के विचार ही चमत्कार है उन्हें अपने जीवन में धारण करने से तमाम प्रकार के दुखों से दूर होकर संसार की सेवा की जा सकती है एवं संसार से दुखो की समाप्ति हो सकती है। भदंत प्रज्ञा शरण ने बताया तथागत बुद्ध धम्म की शिक्षा के लिए सदैव पैदल ही चले उन्होंने किसी प्रकार की भौतिकता का अपने संन्यासी जीवन में प्रयोग नहीं किया। आज समूचे एशिया में तथागत बुद्ध अनुनायीं हैं।जिसका मूल कारण है बुद्ध सबका मंगल चाहते है। बाबू रामदीन ने तथागत बुद्ध के पंचशीलों का पालन करने हेतु लोगों से आह्वान किया उन्होंने कहा कि मनुष्य का आत्मबल ही उसकी आत्मरक्षा कर सकता है और तथागत बुद्ध के मार्ग पर चलने से ही मनुष्य को सच्ची शांति की प्राप्ति हो सकती है। कार्यक्रम का आज का संचालन राम बिहारी बौद्धाचार्य ने सकुशल रूप से किया। वही भदंतशीलप्रकाश कुशीनगर, भदंत ज्ञान ज्योति, धम्मशील राहिया,ने भी तथागत बुद्ध के धम्म मार्ग पर विचार रखे। बौद्ध अनुयायियों ने भिक्षुगणो भोजन दान किया। कार्यक्रम में रामाधीन बाबू जी,रामकुमार राय,मोतीलाल पप्पू, चंद्रशेखर,माता प्रसाद गौतम, राजकुमार, उमाशंकर, ईश्वरदास,
रामकली,हेमा गौतम, अर्चना गौतम, पूनम गौतम, मैयादीन भगवान दास ,राम जी गौतम राजकुमार, मंगल सिंह फौजी दुली चंद्र विश्वकर्मा ,रामेश्वर विश्वकर्मा,हरनारायण दोहरे,प्रमोद गौतम,कुलदीप, बच्चा, सुशील, बेटू, हर्ष, कृष शनि, रवि अभिषेक समेत जिले के कोने-कोने से आये सैकड़ो सामाजिक कार्यकर्ता और विशिष्ट जनों उपस्थित रहे।
