गुरसरांय(झांसी)। नगर में इन दिनों सरकारी और निजी विद्यालयों के समय पर ही कोचिंग संस्थानों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। शासन और प्रशासन के सख्त निर्देशों के बावजूद,कोचिंग संचालक नियमों को ताक पर रखकर सुबह से ही अपनी कक्षाएं सजा रहे हैं। इस वजह से विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग इस पूरे मामले पर आंखें मूंदे बैठा है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी कोचिंग संस्थान विद्यालयी समय के दौरान संचालित नहीं किया जाएगा। इसके पीछे का उद्देश्य यह है कि बच्चे नियमित रूप से स्कूल जाएं और उनकी मुख्य शिक्षा प्रभावित न हो। अब बड़ा सवाल यह है कि जब सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक विद्यालय खुलते हैं, तो उसी समय कोचिंग सेंटर्स में छात्र कैसे पढ़ रहे हैं। नगर के विभिन्न मोहल्लों और मुख्य चौराहों पर सुबह से ही कोचिंग जाने वाले छात्र-छात्राओं की साइकिलें खड़ी देखी जा सकती हैं। कई कोचिंग संचालक तो बकायदा स्कूल टाइमिंग के बीच ही अपने नए बैच चला रहे हैं। स्कूलों में घट रही उपस्थिति और अभिभावक परेशान देखे जा रहे हैं। इस लचर व्यवस्था का सीधा नुकसान विद्यार्थियों के भविष्य और स्कूलों की साख को हो रहा है। बच्चे स्कूल बंद करके या स्कूल न जाकर सीधे कोचिंग सेंटरों का रुख कर रहे हैं। अभिभावक स्कूलों में भारी-भरकम फीस भी दे रहे हैं और फिर कोचिंग के नाम पर भी मोटी रकम वसूल की जा रही है। स्कूल टाइम पर सड़कों पर कोचिंग जाने वाले छात्रों के घूमने से अनुशासनहीनता और यातायात की समस्याएं भी खड़ी हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि कोचिंग संचालकों की इस मनमानी के पीछे कहीं न कहीं प्रशासनिक शिथिलता है। समय-समय पर जांच का दिखावा तो किया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई सख्त कार्रवाई न होने से इन संचालकों के हौसले बुलंद हैं। अब देखना यह होगा कि क्या उच्चाधिकारी और शिक्षा विभाग इस खबर का संज्ञान लेकर इन अवैध रूप से चल रहे टाइमिंग वाले कोचिंग संस्थानों पर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं, या फिर नियमों को इसी तरह ताक पर रख कर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ होता रहेगा।
