गुरसरांय (झांसी)। नगर के लंकापुरी में शनिदेव मंदिर के पास चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का सुदामा चरित्र की कथा के साथ समापन हो गया।भागवत कथा व्यास आचार्य पं भगवत नारायण समाधिया ने भगवान कृष्ण के मित्र सुदामा जी का बर्णन करते हुए कहा कि सुदामा जी परम संतोषी ब्राम्हण थे,जो व्यक्ति संतोषी होता है उसे धनवान कहा गया है।असंतोषी को शास्त्र ने दरिद्र बताया है। कलयुग में भगवान का भजन ही मुक्ति का साधन है।उन्होंने कहा शिक्षा किसी से भी ली जा सकती है,लेकिन दीक्षा गुरु एक ही होना चाहिये।संगीतमय कथा में ऑर्गन पर प्रमोद गोस्वामी,नाल पर देवेंद्र सिंह घोष,सह गायन पर रानू तिवारी,तबला पर धर्मेन्द्र कौशिक ने संगत की।पूजन पं अभिनव कृष्ण शास्त्री ने कराया।भागवत कथा की आरती परीक्षत श्रीमती मंजूलता हरीशंकर चौरसिया ने की।इस मौके पर पं रामेश्वर प्रसाद पाठक रामायणी,मेजर अखिलेश पिपरैया,पूर्व प्रधानाचार्य के के तिवारी कथा व्यास,सतीश चौरसिया, प्रसिद्ध नारायण यादव,चंद्रप्रकाश चौरसिया,जगमोहन समेले, लक्ष्मी नारायण घोष, ओ पी शर्मा,ठाकुरदास तिवारी,रामबाबू शर्मा,सुरेन्द्र कुमार मिश्रा, संदीप कोठारी,रघुराज सिंह मामा,रोहित चौरसिया ,पार्षद विनोद यादव,अशोक मिश्रा,अखिलेश तिवारी ,ब्रजकिशोर दीक्षित,राम चरन झा,राम कुमार चौरसिया, अखिलेश पार्षद,साकेत चौरसिया, प्रमोद चौरसिया, हरिदयाल चौरसिया, उमाशंकर, रमाशंकर, हरेन्द्र परिहार,पप्पू चौरसिया, कल्लू नामदेव,प्रीतम चौरसिया, मिथलेश सेन आदि उपस्थित रहे।
