झाँसी- यूजीसी के खिलाफ देश भर में उठ रहे विरोध के स्वरों के क्रम में झांसी में राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा द्वारा प्रदर्शन कर नारेबाजी करते हुए देश की राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से प्रेषित किया गया। मोर्चा के जिला अध्यक्ष सुयोग्य संजय शर्मा के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता कचहरी के निकट स्थित गांधी उद्यान में एकत्रित हुए और वहां पर धरना देकर प्रदर्शन किया। इस दौरान यूजीसी गो बैक के नारे भी लगे। विभिन्न नारों से युक्त तख्तियों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने गांधी उद्यान से कलेक्ट्रेट तक नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च किया। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया। ज्ञापन में मुख्य रूप से यूजीसी के सभी विवादित नियमों एवं प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से रोलबैक किए जाने, राष्ट्रीय सामान्य वर्ग आयोग का गठन किए जाने, इस आयोग को प्रभावी संवैधानिक एवं कानूनी अधिकार दिए जाने, समान अवसर एवं योग्यता आधारित व्यवस्था बनाए जाने, सभी विद्यार्थियों के लिए समान सुरक्षा लागू किए जाने, शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण नीतियों को लागू करने से पहले विद्यार्थियों, शिक्षाविदों, अभिभावकों एवं समाज के विभिन्न वर्गों से व्यापक सुझाव एवं परामर्श से लिए जाने तथा आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सहायता की व्यवस्था किए जाने की मांग की गई। जिला अध्यक्ष सुयोग्य संजय शर्मा ने कहा कि यूजीसी सीधे सीधे स्वर्ण समाज के विरोध में लाया गया कानून है। पहले से ही अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम का दुरुपयोग हो रहा है। इस कानून के आ जाने के बाद इसका दुरुपयोग कई गुना बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण सभी को समान रूप से दिया जाना चाहिए। आज स्थिति यह है की बडे से बड़े अधिकारी की संताने भी आरक्षण का लाभ ले रही है, जबकि योग्य कहीं पीछे खड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि आरक्षण व्यवस्था लागू करनी है, तो सवर्ण वर्ग के लिए भी आरक्षण लागू होना चाहिए और यदि जातिगत व्यवस्था लागू की जानी है, तो फिर सभी जातियों के हिसाब से अलग अलग आरक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व युद्ध के कयास भले ही लगाये जा रहे हो, लेकिन जिस तरह के हालात हैं, उसमें सामाजिक युद्ध के हालात ज्यादा दिख रहे हैं। यदि इस काले कानून को वापस नहीं लिया गया, तो मजबूरी में हमें भूख हड़ताल करने तथा सड़कों पर आने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
