ललितपुर। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ धर्म और आस्था का गहरा संबंध है। यहाँ अनेक पर्व और त्यौहार मनाए जाते हैं, जिनमें से एक है कांवड़ यात्रा। यह यात्रा भगवान शिव के भक्तों द्वारा सावन मास में की जाती है। इस समय श्रद्धालु पवित्र नदियों का जल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि आस्था, तपस्या और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। ऐसी ही एक भव्य कांवड़ यात्रा ललितपुर जनपद में प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है, जिसमें हजारों की संख्या में शिव भक्त एकत्रित होते हैं। संघर्ष सेवा समिति व विशाल कांवड़ यात्रा सेवा समिति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित होने वाली यह कावड़ यात्रा सावन के अंतिम सोमवार दिनांक 4 अगस्त को सुबह 9:00 बजे तुवन मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर घंटाघर, वीर सावरकर चौक, नेहरु महाविद्यालय से होते हुए मसूटा, घटवार, जामुनधाना, निवाई, घुटाई, एरवानी, बछलापुर, भोता, पाली होकर नीलकंठेश्वर पहुंच कर समाप्त हुई। संघर्ष सेवा समिति के संस्थापक डॉ० संदीप के आगमन पर तिलक व विभिन्न स्थानों पर दर्जनों की संख्या में माल्यार्पण कर उनका स्वागत तथा शॉल, पगड़ी पहनाकर एवं प्रशस्ति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। यात्रा में उपस्थित संघर्ष सेवा समिति के कार्यकर्ताओं ने डॉक्टर संदीप जिंदाबाद एवं संघर्ष सेवा समिति जिंदाबाद के गगनभेदी नारे लगाए। डॉ० संदीप ने हरी झंडी दिखाकर कावड़ यात्रा की शुरुआत की। इस कांवड़ यात्रा में झांकी एवं पुष्प वर्षा के साथ कानपुर के कलाकारों द्वारा भोले व अघोरी तांडव नृत्य का मंचन किया गया। यात्रा में भोलेनाथ एवं पवनपुत्र हनुमान के विशाल स्वरूप अलौकिक छटा बिखेर रहे थे। उज्जैनी डमरू एवं तांसे द्वारा महा आरती की गई, कावड़ यात्रा की अगुवाई में विशाल तोपें पुष्प वर्षा करती हुई यात्रा की शोभा बढ़ा रही थीं। यात्रा के समापन पर नीलकंठ महादेव मंदिर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया यात्रा को भव्य बनाने के लिए जगह-जगह लाइव टेलीकास्ट भी किया गया।
