गुरसरांय (झांसी)। श्री बजरंग मानस प्रचारिणी के तत्वाधान में नगर के पटकाना मोहल्ले में चल रहे श्री रामचरितमानस सम्मेलन के 45वे अधिवेशन अयोध्या धाम से आई आचार्य मांडवी अनुचरी ने राम नाम की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राम नाम का इन दो अक्षर में ही पूरी रामायण है और पूरा शास्त्र है। पुराणों में लिखा है कि ज्ञान, कर्म, ध्यान, योग, तप आदि सभी कलयुग में व्यर्थ सिद्ध होंगे परंतु राम नाम का जप ही लोगों को भवसागर से पार ले जाने वाला सिद्ध होगा। वेद, पुराण और अन्य शास्त्रों से भी बढ़कर है दो अक्षरों वाला राम का नाम। राम नाम के दो सुंदर अक्षर सावन-भादो के महीने हैं। इस नाम की ही महिमा है कि जिसे सभी देवी और देवता जपते रहते हैं।यही नहीं जिस नाम की महिमा का वर्णन शिवजी से सुनकर माता पार्वती भी उनका नाम जप करती हैं। जिनके सेवार्थ श्री शिवजी ने हनुमानजी का अवतार लेकर वे राम का नाम ही जपते रहते हैं। ऐसे प्रभु श्री राम का नाम लिखना,बोलना भवसागर से पार तो लगाता ही है साथ ही यह भक्तों को समस्त प्रकार के दैहिक, दैविक एवं भौतिक तापों से मुक्ति प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि रामचरित मानस में तुलसीदासजी ने राम नाम की महिमा का कई जगहों पर वर्णन किया है- राम नाम का जप एक ऐसी औषधि के समान है, जिसे अगर सच्चे हृदय से जपा जाए तो सभी -व्याधि दूर हो जाती हैं, मन को परम शांति मिलती है। सम्मेलन के दौरान अयोध्या धाम से पधारे एक और अन्य वक्ता राम कृष्ण दास जी महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान बताया कि जीवात्मा को मनुष्य का जन्म बड़े ही सौभाग्य से मिलता है इसलिए मनुष्य जन्म को व्यर्थ में नहीं गवना चाहिए और भगवान के नाम का गुणगान करते रहना चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि राम से भी बड़ा राम का नाम हैं प्रभु श्रीरा राम का नाम राम से भी बड़ा है। राम राम जपने से कई लोगों को मोक्ष प्राप्त हो गया। राम एक महामंत्र है, जिसे हनुमान ही नहीं भगवान शिव भी जपते हैं। अधिवेशन में इसके अलावा बालक दास जी महाराज,राम कुमार दास जी महाराज,नवल दास जी महाराज ने भी अपनी अमृत मई वाणी से मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित करते हुए राम कथा का वर्णन किया। कार्यक्रम का संचालन रानू तिवारी ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रोता समुदाय उपस्थित रहा।
