पर्यावरण दिवस पर सपना हुआ साकार

झांसी पर्यावरण आज की मूल आवश्यकता में से एक है क्योंकि जिस हिसाब से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा कर जो हानि हुई है उसे शायद ही किसी ने पूरा किया हो लेकिन एक व्यक्ति ऐसे हैं जिन्होंने आज से कई वर्ष पहले एक सपना सोचा था क्यों आज के दिन साकार हुआ है उनका सपना था पर्यावरण बढ़ाने का क्योंकि हिसाब से पर्यावरण को नुकसान हो रहा था या उनसे देखा नहीं गया और उन्होंने पेड़ लगाना चालू कर दिया पहले तो किसी ने उनका साथ नहीं दिया लेकिन जब उनके लगाए हुए पेड़ बड़े होकर लोगों को फायदा देने लगे उन लोगों ने उनका समर्थन करना चालू कर दिया उनका शुभ नाम रमेश यादव लोग उन्हें प्यार से बाबू भी बुलाया करते हैं इनका मूल निवास झांसी में ही है अभी इनकी आयु 75 वर्ष है लेकिन वह बताते हैं कि जब उनकी आयु 12 वर्ष की थी तभी से उनकी रूचि पर्यावरण की तरफ थी उन्होंने बताया की पहला पेड़ अपने घर के सामने एक मंदिर के आगे लगाया था और आज वही पेड़ लोगों को काफी फायदा देता है गर्मियों में लोग उसी पेड़ के नीचे पानी पीकर आराम करते हैं बरसात में उसी पेड़ के नीचे भीगने से बचते हैं और अक्सर वहां पर लोगों का जमावड़ा लगा रहता है । यदि करो ने बहुत खुशी होती है वे बताते हैं अक्सर मैं अपनी माता जी को और भी कई अन्य महिला महिलाओं को पेड़ की पूजा करते हुए देखा है साथ ही साथ उन्होंने अपने समय में तो मांगा जिस किसी के यहां भी गाय बंधी रहती थी वह अक्सर उनके यहां से गोबर मांग लिया करते थे ताकि उस पेड़ की खाद अच्छी बन सके और लोग भी बड़े दयालु हुआ करते थे बिना किसी स्वार्थ के मैं भी दिल खोल कर सहयोग करते थे और इसी को देखते हुए लोगों ने मुझे काफी प्रेरित करा जिसके चलते मैंने कई और पेड़ लगाना चालू किया जैसे नीम आंवला आम अमरूद ऐसे में बड़ा होता गया मैंने इस रुचि को अपना पेशा मना लिया तब तक मेरे पास चार पांच गाय भी हुआ करती थी जिसका गोबर तेरे लिए खाद को मनाने के लिए बड़ा काम आता था मेरे लगाए हुए पेड़ भी बड़े होते गए सिकाई सारे पेड़ सदर बाजार इलाके के छावनी इलाके में तब्दील हो गए आज भी ऐसे पेड़ हैं जिनकी लो पूजा करने आते हैं और जिस का सबसे बड़ा उदाहरण मेरे घर के ठीक सामने लगे बरगद के पेड़ का है क्या करते हैं उन्होंने बताया काफी कष्टों का ना करना पड़ा है कई बार उन्होंने पेड़ों को बचाने के लिए कई बार संघर्ष करा उनका वह संघर्ष बर्बाद नहीं गया और आज भी पूरे शहर में घूमते हैं जहां उनके पेड़ लगे हैं उनके लिए माली लगा रखे हैं जिसकी वह देखरेख कर सकें साथ ही साथ वह उसके लिए खाद सामग्री देते हैं उनका ऐसा मानना है कि पर्यावरणीय एक ऐसा मकसद है जिसके रहते हमारा झांसी शहर हरा भरा रह सकता है और यही नहीं पिछली सरकार में समाजवादी पार्टी के नेता पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जन्मदिन पर उन्होंने एक बार कुल 47 पेड़ लगाए थे जिसके चलते लोगों ने सरकार ने उनकी बहुत प्रशंसा करी थी और यही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कई बार इस नेक कार्य को लेकर प्रशंसा करी वे मैं बताते हैं अक्षर अखिलेश यादव उनके इस कार्य को लेकर खुश रहते थे और आज उनकी इस प्रथा को उनका नाती ऋषभ सिंह यादव आगे बढ़ा रहा है और शहर नहीं बल्कि गांव गांव में इस प्रथा के जरिए वह हर एक गांव को एक नया रूप दे रहा है इसलिए आज पर्यावरण दिवस के रूप में रमेश यादव जी को ऐसा लगता है कि उनका एक सपना जो कई वर्ष पहले उन्होंने देखा था अगर साकार हुआ है

रिपोर्ट – सक्षम तिवारी झांसी

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