महामारी के इस दौर में अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहीं महिला कोरोना वॉरियर्स

ड्यूटी धर्म निभाने के लिए बच्चों से दूरी बनाएं है माँ

बरुआसागर (झाँसी) | इस कोरोना महामारी में जब अपनों का साथ नहीं मिल रहा तब महिला कोरोना वॉरियर्स के रूप में ये महिला स्टाफ नर्स ही निस्वार्थ भाव से मरीजों की मदद कर रहे है। कोरोना पीड़ितों की हर तरह की सहायता प्रदान कर रहे हैं और शायद इसीलिए आज इस मुश्किल वक्त में हमारे लिए वह वॉरियर हैं।वॉरियर यानी की योद्धा।बरुआसागर में कोरोना पीड़ितों के लिए जिला प्रशासन द्वारा 75 पलंग वाले अस्पताल को कोविड एल1 के तहत चिन्हित करते हुए यँहा कोविड मरीजों को भर्ती कराया जा रहा है।मरीजों की देखभाल के लिए महिला सहित अन्य स्टाफ तैनात किया गया है।हमारे संवाददाता द्वारा स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात महिला स्टाफ नर्स से बातचीत करते हुए उनके मन की बात जानने की कोशिश की है।अगर बात करें कोविड अस्पताल में तैनात महिला स्टाफ नर्स की तो स्टाफ नर्स को लगातार 14 दिन तक अस्पताल में ही रहकर ड्यूटी निभानी पड़ती है।14 दिन बाद दो दिन के लिए घर मे कोरेन्टीन होना पड़ता है।इसके बाद पुनः ड्यूटी की सूचना दे दी जाती है।

सीमा ने कहा…

कोविड एल1 अस्पताल में ड्यूटी निभा रही सीमा यादव ने बताया कि वह पास के ही एक गांव तेन्दोल निवासी है।अपने परिवार के बारे में सीमा ने बताया कि उनकी एक दो साल की बेटी है बाबजूद इसके वह अपना ड्यूटी धर्म को प्राथमिकता देते हुए पहले निभा रही है।सीमा बताती है कि उनको अपनी मासूम सी बेटी की चिंता तो रहती है लेकिन उससे भी ज्यादा अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखभाल की भी जिम्मेदारी वह बखूबी निभा रही है।सीमा ने ड्यूटी के दौरान बताया कि यह उन्हें जीवन में एक सेवा करने का अवसर मिला है।जिसे बिना किसी टीस के वह निभा रही है।कहती है कि वक्त मुश्किल भरा जरूर है पर इससे हम बाहर निकलेंगे। मुश्किलें आती हैं और आती भी रहेंगी। बाधाएं व्यवधान जरूर पैदा करती हैं पर लक्ष्य से नहीं हटा पाती। 

अर्चना ने बताया….

मूल रूप से जिला उरई निवासी अर्चना देवी बरुआसागर के कोविड अस्पताल में तैनात है।अर्चना की अभी शादी नही हुई है।लेकिन अर्चना के परिवार में उनके माता पिता और अन्य भाई बहिन भी है।जिसकी जिम्मेदारी अर्चना की है।अर्चना अपनी ड्यूटी को फर्ज के साथ साथ मानवीय सेवा धर्म भी मानती है।उनका कहना है कि जब पूरा देश इस वैश्विक महामारी के दौर से गुजर रहा है तब अगर हम पीड़ित के लिए अगर उनकी समुचित देखभाल करते हुए सेवा करते है तो मन से मरीज ओर जल्दी ठीक हो जाता है।अर्चना का कहना है कि उनके परिवार सहित अपनों ने साथ दिया है तभी साहस और हिम्मत हमेशा बनी रहती है। पर साथ उनका मिले जो निस्वार्थ होकर दूसरों की सेवा में लगे हैं तो वह सबसे बड़ा प्रेरणा का काम करता है। 

स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ प्रिया सिंह

कोविड अस्पताल सहित वेक्सीन ओर कोविड जांच सहित बरुआसागर स्वास्थ केंद्र की जिम्मेदारी संभाल रही केंद्र प्रभारी डॉ प्रिया सिंह ने कोविड अस्पताल के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कोविड मरीजों की देखभाल सहित उपचार की व्यवस्थाओं को वहाँ पर तैनात महिला स्टाफ सहित अन्य कर्मचारी बखूबी निभा रहे है बताया कि अपने बच्चों और परिजनों से दूर महिला स्टाफ नर्स पूरी संजीदगी के साथ मरीजों की देखभाल करती है।कहा कि निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले लोगों पर ही आज हमारे समाज की नींव टिकी हुई है। इस कोरोना महामारी में जब अपनों का साथ नहीं मिल रहा तब यही निस्वार्थ भाव से मदद कर रहे लोग हमारी सेवा में आगे आ रहे हैं। हमें हर तरह की सहायता प्रदान कर रहे हैं और शायद इसीलिए आज इस मुश्किल वक्त में हमारे लिए वह वॉरियर हैं। वॉरियर यानी की योद्धा। यही कारण है कि इनके लिए कितनी भी शब्दों में तारीफ की जाए वह कम पड़ जा रही हैं। स्त्री हो या फिर पुरुष, आज इस महामारी के दौर में हर रूप में कोरोना वॉरियर्स हमारी मदद को तत्पर हैं।

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